एटा। जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद खुले निराश्रित गोवंशों की समस्या दूर नहीं हो सकी है। अब प्रशासन ने यह समस्या ग्राम प्रधानों के पाले में डाल दी है। प्रधानों को अपनी पंचायत से निराश्रित गोवंशों को गोशालाओं में पहुंचवाकर प्रमाणपत्र देना होगा कि अब कोई निराश्रित गोवंश खुले में नहीं घूम रहा। इसके लिए 12 अप्रैल की तारीख तय की गई है।
निराश्रित गोवंश आम से लेकर खास लोगों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। शहर हो या गांव, सड़क हो या खेत, हर जगह खुले घूम रहे गोवंश मिल जाते हैं। इनकी वजह से सड़कों पर आए दिन हादसे भी होते हैं। जिला कलक्टर से लेकर इंस्पेक्टर तक को निराश्रित गोवंशों से मुक्ति दिलाने के निर्देश शासन कर चुका है। लेकिन अब तक खुलेआम गोवंश घूम रहे हैं।
अब प्रधानों को दायित्व सौंपा गया है कि अगर ग्राम पंचायत में गोवंश घूमता पाया जाता है तो प्रधान को जवाब देना होगा। हर प्रधान को 12 अप्रैल तक हर हालत में प्रमाणपत्र देना होगा कि उसकी ग्राम पंचायत में कोई निराश्रित गोवंश नहीं घूम रहा है। अगर घूमता पाया गया तो प्रधान के खिलाफ कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया कि ग्राम प्रधानों को 12 अप्रैल तक प्रमाणपत्र देना होगा। इसी तरह बीडीओ से 15 अप्रैल और सीवीओ को 20 अप्रैल तक जिले में नहीं घूमने वाले गोवंशों का प्रमाणपत्र देना होगा। इसके बाद शासन को प्रशासनिक स्तर से रिपोर्ट भेजी जाएगी। इस पर सभी को अमल करना है। शासन की ओर से दो बार समय दिया गया था। लेकिन फिर भी खुले में गोवंश घूम रहे हैं, यह चिंता का विषय है। संवाद