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Etah News: अबूझ बना हुआ है भाजपा के लिए पटियाली का तिलिस्म

Sun, 07 Apr 2024 10:19 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
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एटा। मोदी लहर में हुए 2014 और 2019 के चुनाव में एटा लोकसभा सीट पर कमल शानदार ढंग से खिला था। लेकिन इस लोकसभा क्षेत्र की पटियाली विधानसभा सीट ऐसी है, जहां कमल को झुलसन महसूस होती रही है। इन दोनाें चुनावों में पांच विधानसभाओं में से केवल पटियाली विधानसभा सीट ही ऐसी थी जहां भाजपा को कड़ी टक्कर मिली थी।
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एटा लोकसभा सीट पांच विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर बनी है। जिसमें एटा की एटा सदर और मारहरा तथा कासगंज जिले की कासगंज, अमांपुर और पटियाली विधानसभा सीट शामिल हैं। मुस्लिम बाहुल्य पटियाली विधानसभा क्षेत्र पूर्व में बसपा और सपा का गढ़ कहा रहा था। जहां एक-एक बार कर दोनों पार्टियों के विधायक चुने जाते थे। 2017 में भाजपा की आंधी चली तो यहां लंबे अरसे बाद पार्टी सीट को अपने पाले में खींच पाई थी। लेकिन अगले ही चुनाव 2022 में सपा ने इसे वापस हथिया लिया। मुस्लिम बाहुल्य इस सीट के जातीय समीकरण भाजपा के लिए इतने जटिल हैं कि यहां जीत की हर रणनीति फेल हो जाती है।
2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी की प्रचंड लहर थी। ऐसे में एटा लोकसभा सीट पर भाजपा के पक्ष में बंपर मतदान हुआ। कुल 4,74,978 मत मिले थे। जबकि सपा के खाते में 2,73,977 मत आए। इस तरह भाजपा ने 2,01,001 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। आलम यह था कि विधानसभा क्षेत्रों में भी 40 हजार से अधिक की बढ़त भाजपा को मिली थी। लेकिन पटियाली विधानसभा सीट ऐसी थी कि जहां भाजपा को महज 558 मतों की ही बढ़ मिल पाई थी।
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2019 में भी मोदी मैजिक बरकरार था। चुनाव परिणाम में उसका असर भी देखने को मिला। भाजपा को 5,45,348 मत हासिल हुए। सपा का भी चुनाव दमदार रहा था और उसके हिस्से में 4,22,678 मत रहे थे। दो विधानसभा सीटें ऐसी थी जहां करीब 45-45 हजार वोटों से भाजपा आगे रही। जबकि दो सीटों पर 14 हजार और 20 हजार का अंतर भाजपा के पक्ष में रहा। लेकिन पटियाली विधानसभा क्षेत्र में एक बार फिर कमल झुलस गया। इस बार बढ़त तो दूर, सपा से 2572 मत कम मिले थे।
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