एटा। वित्तीय अनियमितता में दोषी पाए जाने के बाद एटा के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक पर कार्रवाई तो की गई, लेकिन परिवहन निदेशालय में मामले को लेकर लापरवाही बरती गई।
डीएम ने जनवरी में ही एआरएम को फर्जी वाहन के भुगतान को लेकर शासन को कार्रवाई की संस्तुति की थी। लेकिन यह रिपोर्ट दबाकर एआरएम को 4 मार्च को प्रोन्नति दे दी गई। इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंच गई है।
प्रभारी एआरएम एटा राजेश यादव द्वारा फर्जी तरीके से स्टाफ कार लगाकर भुगतान किए जाने की शिकायत सदर विधायक विपिन वर्मा डेविड तथा जैथरा क्षेत्र के शिकायतकर्ता सुनील पांडे ने की। जिलाधिकारी प्रेम रंजन सिंह ने जांच कराई और 3 जनवरी 2024 को एआरएम को वित्तीय अनियमितता का दोषी मानते हुए प्रमुख सचिव परिवहन विभाग को रिपोर्ट भेज कार्रवाई की संस्तुति की। लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
शिकायतकर्ता सुनील पांडे ने मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में उच्चाधिकारियों की मिलीभगत से जिलाधिकारी की रिपोर्ट दबाकर गलत तरीके से प्रभारी एआरएम को प्रोन्नति का लाभ देकर एआरएम बनाए जाने का आरोप लगाया है। कहा कि निदेशालय में डीएम की जांच रिपोर्ट को दबा दिया गया। जिसके बाद 4 मार्च 2024 को एआरएम को प्रोन्नति दे दी गई।
जबकि नियमानुसार दोष सिद्ध होने के बावजूद प्रोन्नति नहीं की जा सकती थी। उधर रोडवेज मुख्यालय ने प्रोन्नति देने के बाद एआरएम को फर्जी वाहन के भुगतान मामले में दोषी मानकर वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने तथा भुगतान की गई धनराशि की वसूली के आदेश दिए।