सतगुरु में तेरी पतंग हवा बिच उड़ती जावांगीं साईया डोर हाथो छोड़ी ना, में कटटी जावांगी। कुछ ऐसा ही नजारा था बुधवार को नदरई गेट गुरुद्वारे पर था। गुरुनानक देव के प्रकाश उत्सव पर्व पर नदरई गेट पर आयोजित सत्संग भवन में उत्साह का नजारा बना हुआ था।
सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक जी के प्रकाश उत्सव पर्व पर गुरुद्वारे परिसर को सतरंगी बिजली झालरों और फूल मालाओं से सजाया गया। सिख धर्म के निशान साहब की सेवा कर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। ज्ञानी प्रेमसिंह ने गुरुग्रंथ साहिब का पाठ किया। सत्संग भवन में महिलाओं ने शबद कीर्तन में हिस्सा लिया। ढोलक-मंजीरों की थाप पर महिलाओं ने पंजाबी भजन सुनी अरदास स्वामी मेरी सर्व कला बन आई, प्रकट भई सगले जुगांतर, गुरुनानक की बड़िआई सहित अन्य भजनों का गायन किया। देर शाम को लंगर का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राजेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, दविंदर चंडौक, मनदीप चंडौक, रोली चंडौक, हरप्रीत सिंह, अशोक सिंह, कालू सिंह आदि मौजूद रहे।