इस मार्ग के हालातों से वन विभाग के वृक्षारोपण कार्यक्रम पर सवाल भी उठते हैं। विभाग प्रतिवर्ष लाखों पौधे लगाने का दावा करता है। लेकिन यहां की खाली पड़ी भूमि विभाग के दावों की कलई खोलती है। विभाग द्वारा जो पौधे लगाए जाते हैं। उनके रखरखाव पर भी पूरा ध्यान नहीं दिया जाता है।
पौधों की सुरक्षा को लेकर भी विभाग उदासीन रहता है। सुुरक्षा के लिए पहले तो ट्रीगार्ड लगाए ही नहीं जाते, यदि लगा भी दिए जाएं तो टूट जाते हैं। इससे जानवर पौधों को खा जाते हैं। पौधे बड़े न हो पाने से विभाग का कार्यक्रम पर खर्च किया गया धन यूं ही बर्बाद चला जाता है।
जनपद में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए 390 हेक्टेयर भूमि में 2,53,891 पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वन विभाग के अलावा अन्य विभाग भी इसमेें सहभागिता करेंगे।
- जेपी त्रिवेदी, जिलाधिकारी कासगंज
तालाबों पर हुआ पौधारोपण भी नदारद
आखिर कैसे पौधरोपण सफल हो, कैसे पर्यावरण संरक्षित हो। वीआईपी के हाथों रोपे पौधे भी अब दिखाई नहीं देते। जिला मुख्यालय के झाल के पुल पर तत्कालीन जिलाधिकारी मासूम अली सरवर के हाथों झाल के पुल पर पार्क विकसित करके रोपे गए पौधे भी रख रखाव के अभाव में सूख गए। यही स्थिति ग्राम पंचायतों में बनाए गए आदर्श तालाबों पर नजर आई। लाखों रुपये खर्च करने के बाद तालाबों का जीर्णोद्धार किया और उनके किनारे पार्क विकसित किए गए। तालाब किनारे किया गया पौधरोपण का अधिकतर स्थानों पर नामों निशान गायब है। केवल प्रभु पार्क में ही कुछ हरियाली दिखाई देती है।
पॉलीथिन के प्रयोग पर नहीं लगी रोक
पॅालीथिन के प्रयोगों पर जिले में कभी भी रोक नहीं लगाई गई। न ही इसके लिए कोई विशेष अभियान चलाया गया। जिले भर में पर्यावरण के लिए खतरा बनी पॉलीथिन का प्रयोग हो रहा है। इस ओर प्रशासन का रुख उदासीनता भरा है।