स्टैंड के सामने खड़ी रोडवेज से मिलते रंग की निजी बस। संवाद
एटा। रोडवेज से मिलता हुआ बस का रंग और परिचालक के हाथ में बैग। लगता ही नहीं कि बस प्राइवेट है। भ्रमित होकर यात्री इसमें बैठ जाते हैं। टिकट बनते समय पता लगता है कि गलत बस में चढ़ गए। परिवहन निगम की ओर से कार्रवाई कराए जाने के बावजूद निजी बसों के चालक नहीं सुधर रहे हैं। रोडवेज स्टैंड के सामने ही बसें खड़ी कर रहे हैं।
जीटी रोड पर स्थित बस स्टैंड के सामने अक्सर जाम लगा रहता है। सबसे अधिक समस्या तो तब होती है, जब सुबह के समय बच्चे स्कूल जाते हैं और दोपहर को छुट्टी के समय लौटते हैं। रोडवेज से मिलते रंग की निजी बसें चालक अन्य बसों के बीच में खड़ी कर लेते हैं।
जब रास्ते में हाथ से कटा हुआ सादा टिकट मिलता और हर स्थान पर रुककर जाती है तब पता चलता है कि निजी बस से सफर कर रहे हैं। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक नरेश कुमार गुप्ता ने बताया कि कई बार कार्रवाई की गई मगर कुछ दिन तक ही प्रभाव रहता है। इसके बाद फिर से पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं। आरोप लगाया कि एआरटीओ और यातायात पुलिस की ओर से कार्रवाई में लापरवाही की जाती है। यही कारण है कि निजी बस संचालकों के हौसले बुलंद हैं।