यूपी बोर्ड परीक्षा में निजी शिक्षण संस्थाएं सहयोग नहीं कर रही हैं। कई शिक्षण संस्थाएं ऐसी हैं जिन्होंने कक्ष निरीक्षक के लिए शिक्षकों को रिलीव नहीं किया है। शिक्षा विभाग ने केंद्र व्यवस्थापकों से रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट आने के बाद उन निजी शिक्षण संस्थाओं की मान्यता खत्म की जाएगी जहां से शिक्षक रिलीव नहीं किए गए हैं। इन विद्यालयों की मान्यता समाप्त करने की संस्तुति बोर्ड को भेजी जाएगी।
गुरुवार को यूपी बोर्ड परीक्षाएं अव्यवस्थाओं के बीच शुरू हुईं। कक्ष निरीक्षकों के लिए निजी शिक्षण संस्थाओं की मदद मांगी गई लेकिन कई प्राइवेट स्कूलों ने अपने यहां से शिक्षक रिलीव नहीं किए हैं। परीक्षा शुरू होने तक निजी विद्यालयों के शिक्षक कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी के लिए नहीं पहुंचे। मजबूरी में केंद्र व्यवस्थापकों ने स्कूल के चपरासियों को कक्ष निरीक्षक बनाकर किसी तरह परीक्षा शुरू कराई है। निजी विद्यालयों की इस मनमानी पर शिक्षा विभाग सख्त हुआ है। परीक्षा केंद्रों से अनुपस्थित कक्ष निरीक्षकों का ब्योरा मांगा गया है। ताकि उन शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। साथ ही निजी विद्यालयों की भी रिपोर्ट तैयार की जा रही है, कि कितने विद्यालयों ने शिक्षकों को रिलीव नहीं किया। जिन विद्यालयों के कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी के लिए शिक्षकों को रिलीव नहीं किया है, उनकी मान्यता समाप्त करने की बोर्ड को संस्तुति भेजी जाएगी। बोर्ड के भी इस संबंध में कड़े निर्देश हैं।
केंद्र व्यवस्थापकों से अनुपस्थित कक्ष निरीक्षकों की रिपोर्ट मांगी गई हैं। उनके खिलाफ भी बोर्ड परीक्षा में लापरवाही के संबंध में व्यक्तिगत कार्रवाई की जाएगी। अभी पूरी जानकारी नहीं है कि कितने शिक्षकों ने परीक्षा नहीं कराई।
मनोज कुमार गिरि, जिला विद्यालय निरीक्षक, एटा।
मजिस्ट्रेट कंट्रोल रूम को उपलब्ध कराएं सूचना
एटा। डीआईओएस ने कहा है कि जिले के सभी जोनल, सेक्टर मजिस्ट्रेट दोनों पालियों के निरीक्षण के बाद शाम साढ़े पांच बजे तक अनिवार्य रूप से कंट्रोल रूम में सूचना उपलब्ध कराएं। इसके अलावा उन्होंने सभी केंद्र व्यवस्थापकों को निर्देशित करते हुए कहा है कि कक्ष निरीक्षकों की पूर्ति के लिए वे संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी से व्यक्तिगत संपर्क स्थापित कर पूर्ति कर लें।
यूपी बोर्ड परीक्षार्थियों पर नकल माफिया ने दबाव बनाना शुरू कर दिया है। पहले ही पेपर में परीक्षार्थियों को आगाह कर दिया था कि अगले पेपर में पैसे लेकर ही आना। लेकिन डरे सहमे परीक्षार्थी शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। शनिवार को हिंदी और अर्थशास्त्र के पेपर के बाद कुछ केंद्रों पर परीक्षार्थियों को संचालकों के स्तर से डराया धमकाया गया। साफ कहा गया कि यदि पैसे हों तो पेपर देने आना, वरना नहीं। ऐसे में जो गरीब परिवार के परीक्षार्थी हैं वे परेशान हो गए हैं कि आखिर क्या करें। बता दें कि बोर्ड परीक्षा में नकल माफिया ने अब नकल के रेट खोल दिए है। हाईस्कूल के परीक्षार्थियों से जहां ढाई से तीन हजार की वसूली की जा रही है, वहीं इंटर के परीक्षार्थियों से पांच से छह हजार रुपये मांगे जा रहे हैं। नकल के लालच में कई परीक्षार्थी संचालकों पैसे दे भी रहे हैं।