यह लोकतंत्र में अटूट विश्वास का ही नतीजा रहा कि बूथों पर बीमार, दिव्यांग, वृद्ध भी मतदान करने को पहुंचे थे। इनमें कोई ट्राई साइकिल के सहारे आया था, तो कई बूढ़े लाठी से टेकते-टेकते मतदान बूथ तक आते नजर आए। पैर से दिव्यांग बैसाखी के सहारे भी वोट डालने आए थे।
लोकतंत्र के महापर्व में यह दृश्य कासगंज, पटियाली, अमापुर के लगभग सभी बूथों पर दिखा। दिव्यांग, बीमार वोटरों की मदद बूथ मित्रों ने की। कासगंज के आजाद गांधी इंटर कॉलेज में बीमार शकुंतला देवी अपने बहू-बेटे के साथ मतदान आई थी। उन्होंने बताया कि वे हमेशा वोट डालती रही हैं। इस बार तबीयत ठीक नहीं है। तो वे बेटा-बहू के साथ मतदान केंद्र पहुंची। सिढ़पुरा के मतदान केंद्र पर वृद्ध दंपति यूनुस-शमीम बानो साइकिल से मतदान को पहुंचे। फतेहपुर के गांधी इंटर कॉलेज पर बुजुर्ग मतदाता महावीर भी लाठी के सहारे मतदान केंद्र पर पहुंचे थे।
बताया कि अब तक वे सात विधानसभा चुनाव में वोट डाल चुके हैं। जब भी चुनाव आता, वे मतदान जरूर करते हैं। पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिढ़पुरा पर दिव्यांग यूसुफ बैसाखी के सहारे, तो मतदान केंद्र पीआर इंटर कॉलेज पर 80 वर्षीय कौशल्या देवी, 71 साल की सुशीला भी मतदान की। नवाब तरौरा मतदान केंद्र पर पहुंचे दिव्यांग मतदाता पप्पू, सतपुरा माफी के दिव्यांग राजेश, नगरपालिका के मतदान केंद्र पर बीमार मुस्तफा ने भी मतदान किया।