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खास खबर: अंग्रेजी का मोह छोड़ा, देवभाषा से नाता जोड़ा

Thu, 25 May 2023 11:47 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
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एटा। चमक-दमक भरी दुनिया और अंग्रेजी में वार्तालाप के जरिए अफसर, डॉक्टर, इंजीनियर बनने की अभिलाषा। इस मोह को छोड़ ये छात्र देवभाषा से नाता जोड़ चुके हैं। उनकी नजर में संस्कार, संस्कृति और धर्म सर्वोपरि है। उसको अपने मन-मस्तिष्क में पूरी तरह समाहित करने के लिए दिन-रात मेहनत में जुटे हैं। एटा के गुरुकुल में चल रहे पुनश्चर्या शिविर में दिल्ली से पहुंचे 9 छात्र अपनी धाराप्रवाह संस्कृत भाषा से लोगों को इस भाषा का महत्व और उद्देश्य समझा रहे हैं। साथ ही स्थानीय छात्रों को यह भाषा बोलने में पारंगत बना रहे हैं। कासगंज रोड स्थित आर्ष गुरुकुल में यह शिविर 21 मई से शुरू हुआ, जो 30 मई तक चलेगा। इसमें दिल्ली के बृजानंद संस्कृत गुरुकुलम, हरिनगर से 9 छात्रों को आमंत्रित किया गया है। जो विभिन्न जिलों के रहने वाले हैं। यह सभी छात्र संस्कृत भाषा लिखने-बोलने में निपुण हैं। उद्देश्य है कि इनके माध्यम से स्थानीय गुरुकुल के छात्रों को भी संस्कृत भाषा में अधिक निपुण और सक्षम बनाया जाए।
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पूर्व छात्र परिषद आर्ष गुरुकुल यज्ञतीर्थ एटा के सचिव और संस्कृत शिक्षक संघ दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. ब्रजेश गौतम इस कार्यक्रम को कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आर्ष गुरुकुल को 75 वर्ष से अधिक का समय बीत गया है। यह काफी पुरानी संस्था है। यहां से पढ़े हुए कई छात्र विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दे रहे हैं। कोविड के दौरान यहां छात्र संख्या में कुछ कमी हुई है। इसमें वृद्धि के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।



मेरे घर के तीन बच्चे दिल्ली गुरुकुल में शिक्षारत हैं। जिन्हें यहां पुनश्चर्या शिविर में भेजा गया है। आधुनिक शिक्षा में धर्म, संस्कृति और संस्कार की बात ही नहीं होती। इनमें पढ़कर छात्र पैसा कमा सकते हैं, लेकिन सम्मान नहीं। हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे सम्मान प्राप्त करें। संस्कृत के क्षेत्र में अपना नाम रोशन करें। - राजवीर देव, शाहजहांपुर
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एक बच्चा दिल्ली गुरुकुल में पढ़ रहा है। जिसके साथ यहां आया हूं। मैं पेशे से किसान हूं। अपने पुत्र को इंजीनियर, डॉक्टर के बजाय संस्कृत का विद्वान आचार्य बनाना चाहता हूं। अंग्रेजी आधारित पढ़ाई में मानवीय मूल्यों की कमी आती जा रही है। संस्कृत पढ़कर बच्चे देश को दशा और दिशा प्रदान कर सकते हैं। - केशेंद्र, डहरपुर कलां, बदायूं
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