श्राद्घ पक्ष का अंतिम दिन पितृों को समर्पित रहा। लोगों ने गंगा स्नान कर पितृ शांति के लिए शांति के लिए जलदान और ब्राहमणों को भोजन कराया।
सोमवार का दिन पितृों के नाम रहा। एक पखवाड़े से चल रहे श्राद्घ कार्य के बाद अंतिम दिन भी लोगों ने भूले बिसरे पितृों की शांति के लिए पुण्य कार्य किए। ऐसे में लोगों ने घरों पर ब्राहमणों को भोजन करा दान पुण्य किया। रविवार शाम और सोमवार को जिले के हजारों लोग सोरों-कछला गंगा स्नान के लिए रवाना हुए।
सोमवार की अमावस्या इसके महत्व और शुभ फल को और भी बढ़ा देती है। ऐसे में श्राद्घ पक्ष की सोमवती अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है। शूकर क्षेत्र में हजारों लोगों ने पितरों की शांति एवं समर्पण के लिए इस पुण्य पर्व एवं तिथि का लाभ उठाया।
- ब्रहमर्षि, डा सुधांशु निर्भय