गल्ला मंडी में क्रय केंद्र पर किसानों के इंतजार में बैठे केंद्र प्रभारी। संवाद
एटा। जिले में गेहूं खरीद की रफ्तार मंद है। क्रय केंद्रों पर अब तक मात्र 60 हजार क्विंटल ही खरीद हो सकी है जबकि पहले निर्धारित 3.70 लाख क्विंटल के लक्ष्य को घटाकर अब 1.35 लाख क्विंटल कर दिया गया है। 15 जून तक खरीद पूरी करने का लक्ष्य है, जिसके लिए पूरा विपणन विभाग तैयारी में जुटा है।
जिले के ज्यादातर क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। किसान सरकारी दर की जगह मंडियों में उपज बेचने में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं। मंडी में गेहूं का भाव 2550 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है जबकि क्रय केंद्रों पर समर्थन मूल्य 2585 प्रति क्विंटल है। भाव का मामूली अंतर और भुगतान में होने वाली देरी को लेकर किसान मंडियों के प्रति ज्यादा आकर्षित दिखाई दे रहे हैं।
क्रय केंद्रों के प्रभारियों ने बताया कि किसानों का झुकाव आढ़तियों की तरफ बढ़ा है क्योंकि कम उपज व त्वरित भुगतान किसानों को मंडियों की ओर खींच रहा है।
मौसम की मार से उपज में भारी कमी
किसान सुनील कुमार का कहना है कि मौसम की मार ने इस बार फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। ओलावृष्टि और बदले मौसम ने गेहूं की पैदावार घटा दी, जिसका सीधा असर खरीद पर दिखाई दे रहा है। बताया कि पिछले वर्ष एक बीघे में चार क्विंटल गेहूं निकला था जो कि इस बार 2.5 क्विंटल तक रह गया। खर्च बढ़ा लेकिन उत्पादन घट गया।
इस बार मंडी में किसानों की आवक पहले से कम है, लेकिन जो माल आ रहा है वह सीधे हमारे पास ही बिक रहा है। किसान क्रय केंद्रों के चक्कर कम लगा रहा है क्योंकि भुगतान और तौल की प्रक्रिया लंबी पड़ती है। मंडी में किसानों को तुरंत भुगतान मिल जाता है। - वीरेंद्र सिंह, आढ़ती
मौसम की वजह से उत्पादन कम हुआ है और किसानों के पास विकल्प सीमित हैं। सरकारी केंद्रों पर समर्थन मूल्य मंडी मूल्य के लगभग आसपास है जिससे किसान क्रय केंद्रों की वजह आढ़त पर गेहूं की बिक्री कर रहा है। - शेखर गुप्ता, आढ़ती