एटा सैनिक पड़ाव में चल रही रामलीला में शनिवार शाम विजयदशमी पर्व पर रावण वध का मंचन किया गया। प्रभु श्रीराम ने बुराई के प्रतीक रावण का वध किया। इसके बाद अग्निबाण से दंभ रूपी उसके पुतले का दहन किया। शहर के अलावा कस्बों में भी दशानन के पुतले फूंककर बुराई पर अच्छाई का पर्व मनाया गया।
मेघनाथ व कुंभकरण के मारे जाने के बाद रावण स्वयं युद्ध के मैदान में उतरा। राम और रावण के बीच जमकर युद्ध हुआ। रावण रथ पर युद्ध कर रहा था और श्रीराम बिना रथ के थे। इंद्रदेव ने अपना रथ भेजा। श्रीराम ने उस पर सवार होकर लंकेश से युद्ध किया। जब रावण के शीश कटने के बाद फिर से नया शीश निकलने लगा तो राम चिंता में डूब गए। विभीषण ने बताया कि लंकेश की नाभि पर प्रहार किया जाए। राम ने नाभि में बाण मारकर रावण का अमृत सूखा दिया जिससे उसका अंत हो गया। इसके बाद रावण के विशालकाय पुतले में राम ने अग्निबाण छोड़कर आग लगाई। इससे पहले लंका दहन की आतिशबाजी भी हुई और रावण के शीश उड़ाए गए।
रावण का पुतला दहन होने के बाद लोगों में उसकी अस्थियां अपने घरों पर ले जाने की होड़ रही। लोग पुतले के जलने के बाद उसमें लगी बांस की खपंच को लूटने में लग गए। रामलीला कमेटी के पदाधिकारी, पुलिस कर्मी लोगों को रोकने का प्रयास भी करते रहे।