पॉलीथिन पर रोक भले ही एक महीने बाद लगे, लेकिन कैबिनेट का फैसला आते ही दुकानदारों में हड़कंप मच गया है। आलम यह है कि जेल और जुर्माने के डर से पॉलीथिन के थोक विक्रेता समय से पहले ही स्टॉक खत्म करने की जुगत लगाने के साथ विकल्प तलाश रहे हैं। साथ ही दुकानदारों ने ग्राहकों से कहना शुरू कर दिया है कि अपने घर से थैला लेकर आओ अब पॉलीथिन नहीं मिलेेगी।
घंटाघर पर पॉलीथिन विक्रेता अंकित वार्ष्णेय ने बताया कि शनिवार को पॉलीथिन पर रोक लगाने और पकड़े जाने पर छह महीने की कैद और पांच लाख तक जुर्माने का पता चला। इससे पॉलीथिन की बिक्री पर भारी असर पड़ा है। सरकार को फरमान सुनाने से पहले विकल्प लाना चाहिए। बाबूगंज बाजार में पॉलीथिन के थोक विक्रेता मुकुल का कहना है कि पॉलीथिन पचास पैसे से एक रुपये तक पड़ती है। जबकि कपड़े और जूट के थैले तीन से पांच रुपये का। ऐसे में सब्जी, गारमेंट, कपड़े, किराना व्यापारी मंहगे झोले में रख कर सामान बेचेेंगे तो सामान की कीमत भी बढ़ेगी।
पॉलीथिन विक्रेता शरद, ने कहा कि पूरे शहर में प्रतिदिन करीब 75 किलो पॉलीथिन के बैग बिकते हैं। सरकार को मांग के हिसाब से दूसरी विकल्प भी बताने चाहिए। अरविंद ने कहा कि आपूर्ति को ध्यान में रख कर पॉलीथिन के प्रयोग पर रोक लगानी चाहिए थी। सरकार के फैसले का विरोध करने वालों में सोनू बाबा, सत्य प्रकाश, जीतू दुकानदार भी शामिल हैं।
शहर में प्रतिदिन करीब सौ किलो पालीथिन एकत्रित की जाती है। प्रदेश सरकार ने पॉलीथिन के उपयोग पर रोक लगाने का फैसला किया है। अब पालिका की ओर से सबसे पहले पालीथिन निस्तारण की योजना बनाई जाएगी।
राकेश गांधी ,पालिका चेयरमैन
आदेश लागू करने के लिए हमारे पास एक महीने का वक्त है। लोगों को पॉलीथिन के उपयोग से होने से वाले नुकसान के प्रति जागरूक करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से अभियान चलाया जाएगा। अभियान में पॉलीथिन के विकल्प को भी शामिल किया जाएगा।
सुनील कुमार यादव, एसडीएम एटा सदर