एटा। कृषि उत्पादन मंडी समिति में अवैध रूप से टिनशेड का निर्माण कराकर दुकानें चलाई जा रहीं हैं। इससे राजस्व को क्षति और प्रशासन को खुली चुनौती दी जा रही है। गल्ला मंडी में 270 दुकानें हैं। इनमें ए श्रेणी की 20, बी श्रेणी की 72 और सी श्रेणी की 178 शामिल हैं। सी श्रेणी की दुकानों में से तीन का आवंटन नहीं हो सका है।
ये दुकानें अनुसूचित जाति एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित हैं। इनके अलावा मंडी की जमीन पर अवैध कब्जा करके टिनशेड से दीवारें और छत बनाकर दुकान तैयार करा ली गई है। इन दुकानों में बैठकर व्यापारी बेधड़क कारोबार कर रहे हैं। इसमें मंडी प्रशासन की भी सांठगांठ बताई जा रही है।
व्यापारिक लाइसेंस देकर करा दिया जाता है कब्जा
मंडी समिति की ओर से व्यापारिक लाइसेंस दिया जाता है। इस लाइसेंस पर गल्ला, सब्जी और लहसुन का कारोबार होता है। दुकान नहीं है तो मंडी समिति अपनी जमीन पर कब्जा कराकर दुकान बनाने में पीछे नहीं है। जिम्मेदारों का साफ कहना है कि लाइसेंस है तो कारोबार कर सकता है दुकान हो अथवा नहीं।
तत्कालीन सचिव ने मंडी से हटवाए थे कब्जे
मंडी समिति में पूर्व में भी टिनशेड की दुकान बनाकर व्यापारियों ने कब्जे किए थे। इनका खुलासा किया गया तो तत्कालीन सचिव अशोक सोलंकी ने मंडी को कब्जा मुक्त कराया था। इसके बाद फिर कब्जे हो गए।