एटा। सावन महीने में कांवड़ का विशेष महत्व माना जाता है। इसको लेकर शिव भक्त टोलियों के साथ रवाना होते हैं। कुछ वर्षों से डीजे की धुनों पर नाचते गाते कांवड़ियों की टोलियां उत्साह के साथ चलने लगी हैं। रविवार को सुबह से लेकर रात भर डाक कांवड़ और कलश कांवड़ लेकर कांवड़िये दौड़ते रहे।
श्रावण माह के चौथे सोमवार को लेकर शनिवार की शाम से ही कांवड़ियां डीजे के साथ वाहनों और बाइकों से बड़ी संख्या में गंगा घाटाें से लौटने लगे थे। लंबी दूरी के कांवड़ियों को कई दिनों तक यात्रा करनी पड़ती है जब कि जिला व आसपास के क्षेत्रों से कांवड़ियों रविवार की शाम को जाते हैं और सोमवार को शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं। इनकी सुविधाओं को लेकर कांवड़ मार्गाें में पुलिस और प्रशासन की ओर से भी तमाम व्यवस्थाएं की गई थी। जगह-जगह पुलिस के बूथ बनाए गए और स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सकों और कर्मियों को लगाया ताकि किसी भी कांवड़िया को परेशानी नहीं हो सके। अगर किसी कांवड़िया को परेशानी होती है तो उसको उचित समाधान दिया जा सके। रविवार की रात भर कांवड़ियों के जत्थे चलते रहे।