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ग्रामीण महिलाओं को ‘भायली’ बना रही स्वावलंबी और जागरूक

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जलेसर में भायली कार्यक्रम के दौरान अधिवक्ता हिमांजली गौतम के साथ मौजूद जीजीआईसी की छात्राएं । - फोटो : ETAH
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एटा। मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल मगर, लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया। जी हां, कुछ ऐसी ही कहानी है ‘भायली’ की। उस अभियान की जिसका मकसद है ग्रामीण महिलाओं को विधिक जानकारी देकर उन्हें स्वावलंबी और अपने अधिकारों के लिए जागरूक करना। इस अभियान को लेकर पहल की थी जलेसर कस्बे की बिटिया सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता हिमांजली गौतम ने। शुरूआत में लोगों ने हिमांजली का मजाक भी बनाया, पर उन्होंने हार नहीं मानी। आज उनके साथ इस अभियान में देशभर के लॉ स्टूडेंट्स की फौज खड़ी है जो गांव-गांव जाकर महिलाओं को उनके विधिक अधिकारों सहित कानून की जानकारी देकर जागरूक कर रही है।
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जलेसर कस्बा निवासी शीलेश चंद गौतम और उनकी पत्नी विनोद गौतम की पुत्री हिमांजली गौतम ने प्रारंभिक शिक्षा जलेसर स्थित न्यू एरा स्कूल से प्राप्त की। कक्षा आठवीं के बाद वह दिल्ली चली गईं और इंटर तक की शिक्षा कुलांची हंसराज कॉलेज से की। इसके बाद दौलतराम महाविद्यालय से राजनीति शास्त्र में एमए और दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई वर्ष 2012 में उत्तीर्ण की। इस दौरान वह कॉलेज की छात्रसंघ की अध्यक्ष भी रहीं। एलएलबी करने के बाद उन्होंने अपने गृह क्षेत्र की महिलाओं को विधिक जानकारी देकर जागरूक करने का बीड़ा उठाया और अपने इस अभियान को नाम दिया- ‘भायली’। इसी नाम से वह इसे संचालित कर रही हैं।
ऐसे हुआ ‘भायली’ का उदय
हिमांजली ने बताया कि वर्ष 2018 में वह एक कॉलेज में लेक्चर दे रही थीं। इसी दौरान किसी छात्रा ने गांव-देहात की महिलाओं के विधिक अधिकारों के बारे में सवाल पूछा। इससे उनके मन में यह विचार आया और उन्होंने ‘भायली’ नाम से कार्यक्रम शुरू किया। ‘भायली’ शब्द उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित शब्द सखी या सहेली से लिया, जिससे ग्राम की महिलाएं स्वयं को इससे जोड़ सकें।
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30 छात्र कर रहे जागरूक
हिमांजली ने बताया कि उनके पास नेशनल लॉ कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय सहित अन्य कॉलेजों के छात्र-छात्राएं इंटर्नशिप के लिए आते हैं। वर्तमान में करीब तीस छात्र इस प्रोजेक्ट से जुड़कर गांव-देहात में महिलाओं को विधिक जानकारी दे रहे हैं।
छोटे-छोटे मसलों पर भी देते हैं कानूनी सलाह
टीम के सदस्य छोटे-छोटे मसलों पर भी महिलाओं को कानूनी सलाह देते हैं। मसलन ग्राम में कोई व्यक्ति शराब पीने का आदी है या अन्य घरेलू हिंसा के चलते पत्नी को घर खर्च नहीं देता है तो पत्नी उससे सीआईपीसी की धारा 125 के तहत बिना तलाक लिए हुए भी घर खर्च पाने की हकदार है।
दो दिन चलाती हैं अभियान
‘भायली’ के सदस्य शुक्रवार और शनिवार को विभिन्न स्कूल-कॉलेज, गांव में चौपाल लगाकर और विभिन्न संस्थाओं के कार्यक्रम में बालिकाओं और महिलाओं को दो घंटे विधिक जानकारी देते हैं।
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