रेलवे रोड स्थित पुस्तक भंडार पर लगी भीड़ ।संवाद
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एटा। कुछ निजी विद्यालय महंगी पाठ्य पुस्तकों सहित अन्य सामान को लेकर अभिभावकों को मजबूर कर रहे हैं। नए शिक्षण सत्र का आधा महीना बीतने के बाद शिक्षा विभाग को इसकी सुध आई। इसके बावजूद किसी का चिह्नांकन कर कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि पत्र जारी कर औपचारिकता भर निभाई गई है। यहां तक कि लोगों को शिकायत करने के लिए हेल्पलाइन नंबर तक नहीं दिया गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से जिला विद्यालय निरीक्षक तो वहां से प्रशासन के स्तर का मामला बता दिया जाता है। ऐसे में शिकायतकर्ता भटकता रह जाता है।
यह लिखा गया है पत्र में
स्ववित्त पोषित मान्यता प्राप्त, सीबीएसई, आईसीएसई माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को डीआईओएस की ओर से भेजे गए पत्र में विद्यालयों द्वारा यूनिफॉर्म एवं पुस्तकों को व्यवसायिक दृष्टि से न बेचने के लिए स्ववित्त पोषित अधिनियम के अध्याय-2 का हवाला दिया गया है। कहा गया है कि किसी छात्र को पुस्तकें, जूते, मौजे, यूनिफॉर्म आदि किसी विशिष्ट दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। सभी प्रधानाचार्य इस प्रावधान का पूरी तरह अनुपालन करें। किसी अभिभावक से सामान खरीदने के लिए किसी प्रकार से दुकान या स्थान का नाम प्रकट नहीं करेंगे। इस व्यवस्था का उल्लंघन पाया जाएगा या शिकायत प्राप्त होती है तो विद्यालय प्रबंधक या प्रधानाचार्य के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी।
बिल तक नहीं देते विक्रेता
लोग शिकायत करें तो कैसे, पुस्तक व अन्य सामान विक्रेता खरीद का बिल तक नहीं देते हैं। एक दुकान पर यूनिफॉर्म खरीद रहीं प्रियंवदा, रूपा सहाय ने बताया कि बाजार में इसी कपड़े की यूनिफॉर्म 250-300 रुपये की उपलब्ध है, लेकिन स्कूल का एक लोगो लगाकर इसे 500-600 में बेचा जा रहा है। बिल मांगा तो दुकानदार ने मना कर दिया। ऐसे में बिना बिल शिकायत किस आधार पर करें।