जिस प्रकार सूर्य की तपिश ठंड दूर करती है, उसी प्रकार परमात्मा का स्मरण जीवन में खुशियों का संचार करता है। यह सीख तीर्थनगरी के शिवराज पशु मेला ग्राउंड में मानव मंगल मिलन सद्भावना समागम में विश्व साकार हरि भोले बाबा ने दी।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग ईश्वर के नाम को बेच रहे हैं। अपना ईमान जमीर बेच रहे हैं। यह सब काम करके वे भले ही ऐश्वर्यवान हो जाएं, किंतु वेद पुराणों के मुताबिक उनकी कीमत फूटी कौड़ी की भी नहीं है। उन्होंने श्रद्धालुओं को चेताया। कहा कि शरीर पर गुमान मत करो, यह तो सिर्फ हाड़ मांस का है। खुद को पहचानो। शरीर में सिर्फ एक ही नूर समाया है परमात्मा। कुसंगति, कुमार्ग, कुकर्म छोड़ दो। मोह, अहम, काम वासना, अपने-पराए, झूठ में डूबे मनुष्यों का साकार विश्व हरि की शरण में जाने से ही कल्याण संभव है। शिष्य-गुरू को परिभाषित करते हुए कहा कि सच्चा शिष्य वही है जो गुरू की बताई बातों को आत्मसात करे। मौके पर उत्तर प्रदेश के अलावा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, दिल्ली, झारखंड, पंजाब, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, हरियाणा आदि राज्यों और नेपाल से भी श्रद्धालु आए थे। समागम स्थल से पांच किलोमीटर तक के मार्ग में हर तरफ भक्तों की भीड़ ही थी। महिला सेवादार श्रद्धालुओं की पानी, धर्मप्रेमी शर्बत की प्याऊ लगाए थे। मौके पर प्रबंध कमेटी के महेंद्रपाल सिंह, रमेशचंद्र, पंकज भार्गव, जयराम सिंह, राजू अग्रवाल, लक्ष्मन सिंह, रामबाबू, वेदपाल मौजूद रहे।