जिले की फिज़ा सांस लेने लायक भी नहीं रही है। बढ़ते धुएं और वाहनों की फिटनेस की अनदेखी के कारण यहां की हवा जहरीली हो चुकी है। जिले में वायु और ध्वनि प्रदूषण में बेतहाशा वृद्धि हुई है। आलम यह है कि शहर की सड़कों पर धुआं उड़ाते दौड़ते तेज आवाज वाले वाहन और पुराने हो चुके डीजल चालित वाहन फिज़ा को और जहरीला बना रहे हैं।
सोमवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली में 10 साल पुराने डीजल चालित वाहनों के संचालन पर रोक लगाते हुुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कारगर शुरुआत की है। जबकि दिल्ली की अपेक्षा जिले में वाहनों की संख्या काफी कम है। बावजूद इसके प्रदूषण स्थिति खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है॥ जिले में वायु प्रदूषण की मात्रा 150 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से ज्यादा है। जबकि ध्वनि प्रदूषण का 60-75 डेसिबल के बीच है। ऐसे में प्रदूषण का बढ़ता प्रभाव स्वास्थ्य के लिए तो हानिकारक है। साथ ही भविष्य के लिए भी अच्छे संकेत नहीं हैं। कुछ महीनों पूर्व 15 साल पुराने वाहनों पर रोक लगाने के आदेश आए थे, लेकिन जिले में इन पर अमल नहीं हो सका। हवा में घुलते जहर की रोकथाम के लिए न तो ट्रैफिक पुलिस ने कोई कदम उठाया है और न ही परिवहन विभाग ने। ऐसे में वाहनों का संचालन करते समय मानकों और प्रदूषण का ख्याल कर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है।
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हार्न का शोर बना रहा बहरा
प्रदेश सरकार ने पिछले दिनों प्रेशर हार्न पर पाबंदी लगाई थी लेकिन जिले में यह पाबंदी बेअसर है। तमाम वाहन चालक प्रेशर हार्न का धड़ल्ले से इस्मेताल कर रहे हैं। हार्न का यह शोर से जिले में कई लोगों को बहरा बना चुका है लेकिन आरटीओ प्रशासन इसे लेकर चेता नहीं है।
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जिले में बढ़ रहा ध्वनि प्रदूषण
वर्ष प्रदूषण की इकाई
2012 70 से 76 डेसिबल
2013 75 से 87 डेसिबल
2014 80 से 92 डेसिबल
2015 90 से 98 डेसिबल
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वायु प्रदूषण की स्थिति (माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर)
वर्ष पीएम एसओ एनओ
2013 87 36 41
2014 93 38 44
2015 95 40 48
(आंकड़े अलीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जारी किए हैं।)
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120 माइक्रोग्राम है मानक
रसायन विज्ञान के प्रवक्ता डा. योगेंद्र गुप्ता बताते हैं, सस्पेंडेड पार्टीकल्स ऑफ मेटल, सल्फर डाइ ऑक्साइड व नाइट्रोजन ऑक्साइड की वातावरण में उपलब्धता 120 माइक्रोग्राम होनी चाहिए। इससे अधिक की स्थिति प्रदूषण और इसके विपरीत असर को स्पष्ट करती है।
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स्वास्थ्य को है खतरा
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. निर्मल जैन बताते हैं कि पर्यावरण में वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है। इससे स्वास्थ्य को खतरा है। वाहनों के हार्न की तेज आवाज से बहरेपन की समस्या हो सकती है। वहीं धुएं से एलर्जी और अस्थमा की समस्या हो सकती है।