श्रम विभाग की ओर से श्रमिकों के लिए भले ही 15 महत्वाकांक्षी योजनाएं
संचालित की जा रही हैं, लेकिन पंजीकरण और जागरूकता के अभाव में मजदूरों को
इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिले में अब तक 3700 श्रमिक ही पंजीकृत हैं।
इसमें 22 सौ का पंजीयन तो बीते वित्तीय वर्ष में ही हुआ है।
श्रमिकों के लिए चलाई जा रही दुर्घटना सहायता योजना चलाई के तहत पंजीयन
श्रमिक की कार्यस्थल पर दुर्घटना से मौत हो जाने के बाद मृतक आश्रित को
पांच लाख की धनराशि दी जाती है, वहीं योजना के तहत तीन लाख श्रमिक के पूर्ण
अपंग होने और दो लाख रुपये आंशिक विकलांगता पर दिए जाते हैं, लेकिन
विभागीय आंकड़ों में अभी तक जिले में किसी भी श्रमिक की कार्य स्थल पर
दुर्घटना में न मौत हुई और न ही घायल हुआ है। योजना का लाभ उन्हीं श्रमिकों
को मिलता है, जिनका विभाग में पंजीयन होता है। विभाग के अनुसार यह मुफ्त
बीमा योजना है। इसमें श्रमिकों को किसी भी प्रकार का प्रीमियम नहीं भरना
पड़ता।
यह चल रही योजनाएं
- शिशु हितलाभ, मातृत्व हितलाभ,
बालिका मदद, अक्षमता पेंशन, दुर्घटना सहायता, पुत्री विवाह अनुदान,
मृत्यु-अंत्येष्टि, कौशल विकास तकनीकी उन्नयन, आवास सहायता, पेंशन, सौर
ऊर्जा सहायता, साइकिल सहायता गंभीर बीमारी सहायता, मेधावी छात्र और
मध्यान्ह भोजन योजना।
जिले में नहीं मजदूर संगठन
जिला श्रम
प्रवर्तन कार्यालय में कोई भी मजदूर संगठन पंजीकृत नहीं है। विभाग ने बताया
कि किसी मजदूर संगठन का पंजीकरण यदि सीधे अलीगढ़ कार्यालय से हो तो विभाग
को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।
मनरेगा मजदूरों भुगतान से वंचित
मनरेगा
में जब से एफटीओ के जरिए मजदूरी का भुगतान शुरू हुआ है, समय से मजदूरी
नहीं मिल पा रही है। इसके चलते मनरेगा में मजदूर काम करने में हिचक रहे
हैं। गत वर्ष की अपेक्षा वर्तमान में मनरेगा का पैसा भी कम खर्च हो रहा है।
अलीगंज विकास खंड में तो मजदूरों का अब भी शासन पर लाखों रुपया बकाया चल
रहा है।
विभाग द्वारा श्रमिकों को पंजीयन के लिए जागरूक किया जा रहा है। इससे उन्हें सरकार द्वारा संचालित योजनाओं को लाभ मिल सके।
- चंद्रभान सिंह, जिला श्रम प्रवर्तन अधिकारी