एटा। शहर में प्रत्येक मंगलवार को लगने वाले मंगल बाजार में बिना शुल्क दिए व्यापारी दुकान नहीं लगा सकेंगे। नगर पालिका में पिछले सप्ताह हुई बैठक में मंगल बाजार का ठेका उठाने की बात कही गई। अगर ऐसा होता है तो शहर में लगने वाले मंगल बाजार में दुकानों की संख्या घट भी सकती है।
शहर में पिछले कई वर्षों से मुख्य बाजार बंदी वाले दिन गांधी मार्केट में मंगल बाजार लगता था। वहां लोगों को विभिन्न प्रकार की समस्याएं होती थीं। जिसको देखते हुए अब मंगल बाजार को कैलाश मंदिर के सामने बैकुंठी देवी भवन के मैदान में लगाया जाता है। जहां जिले के शहर व ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही अन्य जनपदों से भी व्यापारी आकर अपनी दुकान लगाते हैं। इस बाजार में रोजमर्रा के साथ ही कई प्रकार के सामान मुख्य बाजारों की अपेक्षा सस्ते दामों में मिल जाते हैं। इसकी वजह से शहर के साथ ही आसपास के गांव देहात से भी लोग यहां सामान खरीदने आते हैं।
वहीं अब इस बाजार में दुकान लगाने के लिए दुकानदारों को एक निर्धारित धनराशि देनी पड़ेगी। उसके बाद ही कोई दुकानदार यहां दुकान लगा पाएगा। पिछले सप्ताह नगर पालिका में हुई बैठक के बाद नगर पालिका अध्यक्ष तथा अधिशासी अधिकारी ने मिलकर यह निर्णय लिया है। निर्णय की भनक जैसे ही दुकानदारों तक पहुंची, वह परेशान हो गए। दुकानदारों का कहना था कि एक दिन में इतनी कमाई हो पाती है कि सिर्फ गुजारा ही हो सके। उसमें से भी जब हम यहां पालिका को शुल्क देंगे तो क्या बचत हो पाएगी?
ये रहेगा निर्धारित शुल्क
प्रत्येक मंगलवार को लगने वाले मंगल बाजार में दुकान लगाने वाले व्यापारियों को एक दिन के लिए 10 गुणा 10 फीट की दुकान का 250 रुपये, 10 गुणा 5 फीट की दुकान का 150 रुपये तथा 6 गुणा 4 फीट की दुकान का 100 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।
शहर में एक ही दिन तो मंगल बाजार में दुकान लगाते हैं। इसके अलावा कोई खास सुविधा मिलती नहीं है। कभी-कभी तो बिक्री भी ढंग से नहीं होती, तो शुल्क कहां से देंगे। -प्रेमपाल सिंह
मंगल बाजार में दुकान लगाकर खास फायदा नहीं होता। माल सस्ता होने के बाद भी ग्राहक अपेक्षाकृत कम आते हैं। इसकी वजह से कमाई भी कम होती है। निर्धारित शुल्क ज्यादा है। -बंटी गुप्ता
निर्धारित शुल्क देने पर दुकानदारों को बेहतर सुविधाएं भी दी जाएंगी। वहीं अगर किसी दुकानदार को कोई समस्या होगी तो समाधान किया जाएगा। -एसके गौतम, ईओ नगर पालिका