एटा। जिले के रामभक्तों का भी अयोध्या मंदिर निर्माण में किसी न किसी रूप में योगदान रहा है। रामभक्ति का जज्बा यह था कि कारसेवा के लिए जाते समय पकड़कर जेल में डाल दिया गया। अयोध्या न पहुंच सकी तो जेल में ही बाबरी मस्जिद का स्वरूप बनाकर विध्वंस किया और श्रीराम के जयकारे लगाए। उन यादों को साझा करते हुए कारसेवक रूपकिशोर गुप्ता आज भी उत्साह से भर जाते हैं। जिन्हें रामकाज के लिए उस समय जेल की रोटियां खानी पड़ीं।
निधौली कलां के रहने वाले लगभग 58 वर्ष के रूपकिशोर ने अमर उजाला के साथ अपने अनुभव साझा किए। बताया कि वे 1990 में बड़े ही जोश के साथ रामजी के दर्शन करने के लिए अयोध्या पहुंचे। मगर वहां काफी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी। जिसके कारण लंबी कतार में लगना पड़ा। जब रामलला के सामने पहुंचे तो दंग रह गए। बहुत कम जगह में तिरपाल के नीचे प्रभु विराजमान थे। हाल देखकर आंखों से अश्रुधारा बहने लगी। दर्शन करने के बाद घर आए तो मन बेचैन हो गया।
रूपकिशोर ने बताया कि कि उन्होंने 1992 में अयोध्या आंदोलन के दौरान अपने कई साथियों के साथ मिलकर पुलिस को गिरफ्तारी दी। थाने में नाम लिखने के बाद उनको जिला कारागार एटा भेजा गया। जहां से कागजात बनाकर मैनपुरी जेल भेज दिया गया। एक दिन रखने के बाद बच्चा जेल में बंद कर दिया गया। यहां प्रतिदिन आरएसएस की शाखा भी लगती थी। किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं थी। सभी कारसेवक मौज में रहे थे।
जेल में मेरे साथ विभिन्न जिलों के लगभग 5000 कारसेवक बंद थे। सभी के ऊपर रामलला को टेंट से मंदिर में बिठाने का जुनून सवार था। बाबरी विध्वंस के समय अयोध्या नहीं पहुंच सके थे। लेकिन जेल में मिट्टी व अन्य सामान से एक मस्जिद की आकृति का निर्माण किया और सभी ने मिलकर उसका विध्वंस किया था। जिससे सभी को आत्मिक खुशी मिली थी। रूपकिशोर कहते हैं कि प्रभु ने पुकार सुन ली, अयोध्या में भव्य मंदिर बन रहा है। 22 जनवरी को रामजी अपने गृह में स्थापित होंगे। घर पर घी के दिए जलाकर उत्सव मनाएंगे। उसके बाद दर्शन करने अयोध्या जी जाएंगे।