नगला पोता में भरा बारिश का पानी ।संवाद
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एटा। जिले में रविवार दोपहर से रात भर बारिश होती रही और अगले दिन सोमवार को भी बारिश आफत बनकर बरसी। शहरी क्षेत्रों में जलभराव और कीचड़ से आफत की स्थिति बन गई। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में किसानों को भारी नुकसान हुआ है। सरसों और आलू की बुवाई पर पानी फिर गया। किसानों को बुवाई के लिए दोबारा लागत और मेहनत करनी पड़ेगी। वहीं धान और बाजरा की फसलों को भी काफी नुकसान हुआ है।
रविवार की दोपहर से सोमवार तक रुक-रुक कर कभी हल्की तो कभी तेज बारिश ने हर ओर मुसीबत खड़ी कर दी। सबसे अधिक नुकसान किसानों को हुआ है। बाजरा की फसल करीब 10 फीसदी बर्बाद हो गई। बाजरा झड़ गया। वहीं धान की फसल खेतों में बिछ गई। करीब 15 फीसदी फसल बर्बाद हुई है। इस बर्बादी की वजह से किसान चिंतित हो उठा है। वहीं आलू व सरसों की बुवाई कर चुके किसानों को दोगुनी मेहनत और लागत लगानी पड़ेगी। कई जगहों पर सरसों व आलू की बुवाई होने के बाद हुई बारिश ने खेत में पड़े बीज को खत्म ही कर दिया है।
कटाई के लिए धान की फसल में हुई देरी
अधिकांश क्षेत्र में धान की फसल खेत में पकी खड़ी है। इसे काटने की तैयारी चल रही है, लेकिन बारिश होने की वजह से कटाई के लिए देरी होगी। अब धान की बाली सूखने के बाद ही किसान फसल काट सकेगा। कई जगहों पर तेज हवा चलने की वजह से धान की फसल खेतों में बिछ चुकी है। जिसके गलने-सड़ने का खतरा बन गया है।
अक्तूबर में बारिश ने तोड़ा 10 साल का रिकॉर्ड
जिले में पहली बार अक्तूबर माह में झमाझम बारिश हुई है। पिछले दस सालों में सबसे अधिक बारिश इस साल देखने को मिली है। इस माह में अलीगंज तहसील में 49 मिमी, एटा तहसील में 40 मिमी और जलेसर में 42 मिमी बारिश हुई है। कुल मिलाकर तीनों तहसील में औसतन बारिश 43.6 मिमी हुई है, जो अब तक के रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा बारिश है। पिछले वर्षों में औसतन 10 मिमी बारिश होती रही है।
गांव कुठिला रामनगर में लाह के खेत मे भरा बारिश का पानी ।संवाद- फोटो : ETAH