एटा। 68 साल पहले 18 जनवरी, 1959 को एटा रेलवे स्टेशन अस्तित्व में आया था लेकिन इसके बाद जिले में रेल नेटवर्क का विस्तार नहीं हो पाया। अब 428 करोड़ रुपये की लागत से 29 किलोमीटर लंबी रेल लाइन को बिछाकर एटा के रेल नेटवर्क को विस्तार देने की कवायद शुरू हो चुकी है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होेने के बाद निर्माण कार्य के लिए टेंडर होंगे। इस लाइन के तैयार होने पर कासगंज, बरेली, कानपुर, लखनऊ, हाथरस, मथुरा तक की कनेक्टिविटी हो जाएगी।
रेल परियोजना के लिए एटा और कासगंज के 20 गांवों की लगभग 116 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है। भूमि अधिग्रहण प्रारंभ हो चुका है। इसके लिए किसानों को मुआवजे की धनराशि पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था के तहत सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। यह रेलमार्ग एटा रेलवे स्टेशन से शुरू होकर नदरई के निकट मथुरा-कासगंज-बरेली रेलखंड से जुड़ेगा। इस रेल लाइन के निर्माण से कृषि उत्पादों और औद्योगिक सामान के परिवहन में भी सहूलियत होगी। रेल संपर्क मजबूत होने से दोनों जिलों में व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।