मिरहची l नगला चोइया में 75 बीघा बाग काटने को लेकर प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। वन विभाग पर सवाल खड़े हो रहे हैं, विभागीय मिली भगत के चलते पर्यावरण को पलीता लगाया जा रहा है जबकि शासन और प्रशासन प्रदूषण बचाने के लिए हरे पेड़ों को लगाने के लिए हर वर्ष करोड़ रुपये का खर्च कर रहा है।
थाना मिरहची क्षेत्र के गांव नगला चोइया में 75 बीघा का बाग करीब 17 लाख में बिक्री किया गया। लकड़ी माफिया कुल्हाड़ी चलाने के लिए और 3 दिन में सैकड़ों पेड़ों काे काट दिया गया। ग्रामीणों ने बताया है क्षेत्रीय रेंजर की मिली भगत से फलदार बाग को काट दिया गया। वन विभाग जानबूझकर अनजान बना हुआ है। वहीं अधिकारी अपने बचाव में मामला संज्ञान में नहीं होने का हवाला देते आ रहे हैं। 3 दिन के बाद भी क्षेत्रीय वन संरक्षण अधिकारी कार्रवाई करने से बच रहे हैं।
बता दें कि अभी भी बाग से कटे सैकड़ों पेड़ के बाद भी इतने ही शेष हैं। इन पर अभी लकड़ी माफिया की आरी चलना बाकी है। लोगों ने बताया है वन विभाग के संरक्षण में इन पेड़ों पर कभी भी आरी चलाई जा सकती है। जिला वन अधिकारी सुंदरेशा ने बताया कि जांच की जा रही है, जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं महिला वन दरोगा की गोपनीय जांच बिठा दी गई है, दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी।