एटा। गोशालाओं में संरक्षित गोवंशों के लिए भूसे की खरीद नहीं हो सकी है। तमाम प्रयासों के बाद भी भूसे के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी नहीं कराई गई, जो ब्लॉक स्तर से पूरी होनी है। वहीं गोशालाओं में संरक्षित गोवंशों के लिए महज 15 दिन का ही भूसा बचा है। इसके बाद गोवंशों के सामने संकट खड़ा हो सकता है। जिले में संचालित 28 गोवंशों में विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार 4950 गोवंश संरक्षित हैं। एक गोवंश लिए प्रतिदिन 10 किलो भूसा प्रति गोवंश के हिसाब से आवश्यकता होती है। जबकि वर्तमान में 6650 क्विंटल भूसे का भंडारण है और 1462 क्विंटल भूसा दान में प्राप्त हुआ है। इस लिहाज से देखा जाए तो प्रति दिन 500 क्विंटल भूसा की खपत होती है और 15 दिन के लिए ही गोवंशों का पेट भरने की व्यवस्था है। इसके बाद गोवंशों का क्या होगा, यह चिंतनीय विषय है।
खंड विकास अधिकारियों को भूसा खरीद करने के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी करानी है। इसके लिए शासन की ओर से भी कई बार पत्राचार कर बताया जा चुका है। इसके बाद भी निविदा प्रक्रिया नहीं की गई और भूसे का भंडारण नहीं हो सका है। जबकि जरूरतमंद लोगों ने भूसे की ज्यादातर बिक्री कर ली है। ऐसे में बाद में महंगी दर पर भूसे की खरीद की जाएगी। इससे सरकार पर अतिरिक्त भार भी पड़ेगा।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया कि गोशालाओं में संरक्षित गोवंशों के लिए भूसा खरीद होनी है। इसके लिए सभी बीडीओ को जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन भंडारण नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में 5 हजार के करीब गोवंश हैं। इनके लिए 8112 क्विंटल भूसा शेष बचा है। अब भूसे की दर में वृद्धि होने की संभावनाएं भी बढ़ गई है।