शीतगृहों में भरे पडे़ आलू के अच्छे दाम मिलने का जब मौका आया तब बाजार में आलू के दाम एकदम गिरे हुए हैं। बाजार में आलू का वाजिब मूल्य न मिलने के कारण किसान इस समय शीतगृहों से आलू की निकासी नहीं कर रहे हैं। बाजार का हाल देख शीतगृह संचालक भी हैरान हैं। हालात यह हो चले हैं कि कोल्ड स्टोर में जमा आलू की कीमतें उसकी बोरी के किराए के बराबर पहुंच रही हैं। चिंता आलू के खराब होने से होने वाले नुकसान को लेकर भी है।
बता दें कि जिले में 19 कोल्ड स्टोर उद्यान विभाग की ओर से पंजीकृत हैं। इसमें एक लाख 41 हजार 775 एमटी आलू का भंडारण किया गया है। वहीं, उद्यान विभाग की मानें तो इसमें से किसानों द्वारा 19849 एमटी आलू अभी तक निकाला भी जा चुका है।
बता दें कि इस बार मौसम अनुकूल रहने की वजह से जिले में आलू की बंपर पैदावार हुई थी। उद्यान विभाग के आंकड़ों के अनुसार गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष लगभग 25 प्रतिशत अधिक आलू की पैदावार हुई थी, लेकिन अचानक मंडी में आलू की कीमतों में आई गिरावट की वजह से किसानों ने कोल्ड स्टोर से आलू का निकालना बंद कर दिया है। आलू किसान गजेंद्र व यशवीर सिंह ने बताया कि मंडी में अभी आलू की बोरी की कीमत दो सौ रुपये है। एक बोरी में 50 किग्रा के आसपास आलू आता है। वहीं, कोल्ड स्टोर का किराया प्रति बोरी 95 रुपये से 100 रुपये के बीच है। ऐसे में किसानों की आधी लागत निकल पाना भी मुश्किल हो रही है। किसानों की मानें तो बरसात को मौसम शुरू हो चुका है। ऐसे में उनके आलू का स्वाद भी अच्छा नहीं रहता है। इसके चलते उन्हें अपना आलू बेचने में भी दिक्कत आएगी।
मंडी में आ रहा बाहर का आलू
एटा। शहर में फुटकर आलू की कीमतें 10 से 12 रुपये किग्रा है। इस पर आलू विक्रेता श्रीकृष्ण ने बताया कि अभी बाजार में बिक रहा आलू बाहर से आ रहा है। जिले में पैदा होने वाले आलू का स्वाद खराब है। इस लिए लोग उसे खरीदने से गुरेज कर रहे हैं।
कोल्ड स्टोर मालिक सकते में
एटा। किसानों द्वारा कोल्ड स्टोर से आलू न निकालने के चलते कोल्ड स्टोर मालिक भी सकते में हैं। जीटी रोड स्थित एक कोल्ड स्टोर के मालिक विपिन वर्मा डेविड ने बताया कि आलू का भंडारण करने के बाद कुछ किसान अपने आलू की कीमत पर कोल्ड स्टोर मालिकों से लोन ले जाते हैं। इसके अलावा बारदाना व बोरियां का किराया भी किसानों के ऊपर बकाया है। ऐसे में यदि समय रहते किसानों ने आलू नहीं निकाला तो कोल्ड स्टोर मालिकों को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा।