एटा। करीब चार साल पहले तत्कालीन सहाय जिला शासकीय अधिवक्ता के साथ हुई बर्बरता के मामले में मंगलवार को एक और रोचक मोड़ आया। अदालत ने तत्कालीन कोतवाली नगर प्रभारी सहित अन्य पुलिस कर्मी व विपक्षियों को अदालत में तलब किया है। नामजद कराए गए तत्कालीन एसडीएम व सीओ को अदालत ने राहत दी है।
शहर के कटरा मुहल्ला निवासी अधिवक्ता राजेंद्र शर्मा ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया था। अदालत के आदेश पर कोतवाली नगर में 11 अप्रैल 2022 को तत्कालीन एसडीएम अबुल कलाम, तत्कालीन सीओ राजकुमार सहित 49 नामजद व 30-40 अज्ञात लोगों पर रिपोर्ट दर्ज की गई। आरोप था कि 21 दिसंबर 2020 को तत्कालीन सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता राजेंद्र शर्मा के कटरा मोहल्ला स्थित घर पर विपक्षी रामू भटेले सहित पुलिसकर्मी सीढ़ी लगाकर छत पर चढ़ गए। परिवार के सदस्यों की पिटाई की। राजेंद्र शर्मा को अमानवीय तरीके से गिरफ्तार कर लिया। घर में रखे सोने, चांदी के जेवर, सीसीटीवी कैमरे का रिकाड, अधिवक्ता की लाइसेंसी पिस्टल ले गए। जबकि पुलिस ने अधिवक्ता और उनके परिवार वालों के ही खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। इसमें उन्हें जेल भेज दिया गया। जमानत पर बाहर आने के बाद अधिवक्ता ने अपने मामले की पैरवी की। इसे भारतीय बार एसोसिएशन तथा उच्च न्यायालय तक ने संज्ञान में लिया था।
इसके बावजूद पुलिस ने अपना मनमानी का रवैया जारी रखा। अदालत से आदेश होने पर रिपोर्ट तो मजबूरी में दर्ज कर ली। लेकिन इसमें एफआर लगाकर 15 मई 2022 को भेज दी। जिसे अदालत में अधिवक्ता राजेंद्र शर्मा ने चुनौती दी। 4 अप्रैल 2023 को अदालत ने एफआर को निरस्त करते हुए मामले को परिवाद के रूप में दर्ज कर सुनवाई शुरू की। मंगलवार को विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र अली रजा ने तत्कालीन कोतवाली नगर प्रभारी अशोक कुमार, उपनिरीक्षक अनुज शर्मा, उपनिरीक्षक अनुज चौहान, उपनिरीक्षक राहुल वालियान, आरक्षी अवनीश कुमार, विजय कुमार, ओमवीर सिंह, मलिखान, सौरभ सहित विपक्षी अविनाश शर्मा आदि को समन जारी कर अदालत में तलब करने का आदेश दिया है। मामले में 16 सितंबर की तारीख तय की गई है।