मारहरा क्षेत्र के कस्बा मोहनपुरा में लगातार तीसरे दिन गुरुवार को भी अधिकांश व्यापारियों ने किसानों की मटर खरीदने से गुरेज किया। किसानों की मानें तो मटर की मंडी में हो रहे बवाल के चलते किसानों को हर दिन लाखों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि गुरुवार को एक दो व्यापारियों ने मटर की खरीद शुरू तो की, लेकिन मंडी में बहुतायत में पहुंची मटर की वजह से एक बार फिर कुछ किसानों की मटर नहीं खरीदी जा सकी।
कस्बा मोहनपुरा की मटर की मंडी देश की बढ़ी मंडियों में शुमार है। यहां से प्रतिदिन सैकड़ों गाड़ियों में मटर देश के विभिन्न हिस्सों में सप्लाई होती है। कस्बा मोहनपुरा जिला कासगंज का राजस्व गांव है और एटा के मारहरा थाना क्षेत्र में आता है। बुधवार को व्यापारियों और किसानों के बीच हुए विवाद के बाद गुरुवार को मटर व्यापारी अपनी समस्याओं को लेकर कासंगज के जिलाधिकारी से मुलाकात करने भी गए। मंगलवार को व्यापारियों और पुलिस प्रशासन के बीच झड़प हुई थी। इसके बाद बुधवार को व्यापारियों ने मटर खरीद न कर बैठक करने लगे। इससे नाराज किसानों ने जाम लगाकर तोड़फोड़ कर दी थी।
व्यापारी मस्त, किसान पस्त
बीते चार दशकों से कस्बा में लग रही मटर की मंडी में व्यापारी मनमाने ढंग से मटर की खरीद करते आ रहे हैं। मटर के रेट भी इनके द्वारा ही तय होते हैं। जागरूक किसानों की मानें, मटर के रेटों में एक ही दिन में तीन सौ से पांच रुपये तक का उतार चढ़ाव आ जाता है। जबकि ऐसा संभव नहीं है। देश की बढ़ी मंडियों व कंपनियों से हर दिन मटर की खरीद का एक ही रेट खुलता है। इसके आधार पर ही मटर की खरीद करनी चाहिए, लेकिन अतिरिक्त मुनाफा कमाने की वजह से दिनभर भाव में उतार चढ़ाव करते रहते हैं। हरी मटर के जल्द खराब होने के डर की वजह से किसानों को मजबूरन मटर बेचनी पड़ती है। इससे मंडी अधिकारी बेखबर हैं। बता दें कि मटर मंडी से शासन को लाखों का राजस्व मिलता है। दूसरी ओर मटर व्यापारी रेवा शंकर ने बताया कि मंडी स्थल न बनने से पूरा व्यापारी वर्ग खासा परेशान है।
हर समय लगता है जाम
कस्बा मोहनपुरा में कासंगज सिकंदराराऊ रोड स्थित एक बाग में मटर की खरीद होती है। रोड के किनारे मटर की खरीद होने के चलते किसानों के मटर की बोरियों से भरे ट्रैक्टर बुग्गी रोड पर ही खड़े रहते हैं। इसके चलते हर समय जाम लगा रहता है।
मोहनपुरा में मंडी स्थल बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। पूर्व में जमीन भी चयनित हो चुकी थी, लेकिन किसी कारणवश सहमति नहीं बन पाई।
- सत्यपाल सिंह गंगवार, सचिव, मंडी समिति