एटा। पंचायती राज विभाग में चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अलीगंज ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत सवा में तैनात एक सफाई कर्मी की मौत हो गई। इसके बाद भी विभाग 6 महीने तक उसका वेतन लगातार खाते में भेजता रहा। यही नहीं करीब दो महीने पहले उसके बेटे को मृतक आश्रित में नौकरी भी दे दी गई। इसके बाद भी मृतक का वेतन जारी रहा।
सफाई कमी प्रकाश की 27 जून 2025 को मौत हो चुकी है। विभाग उनकी मृत्यु के बाद भी बैंक खाते में लगातार वेतन भेजता रहा। आश्चर्य की बात तो यह है कि मृतक के स्थान पर उनके पुत्र गोविंद को मृतक आश्रित कोटे से 15 अक्तूबर 2025 को नियुक्ति दे दी गई और गोविंद ने नौकरी भी ज्वाॅइन कर ली। इसके बावजूद विभाग मृतक पिता और कार्यरत पुत्र दोनों को वेतन जारी करता रहा।
प्रकाश की मृत्यु के बाद जुलाई, अगस्त, सितंबर, अक्तूबर व नवंबर माह का वेतन उनके बैंक खाते में निर्बाध रूप से भेजा जाता रहा। इसी बीच नियुक्ति पाए बेटे गोविंद को भी अक्तूबर और नवंबर माह का वेतन भी जारी कर दिया गया। इस दोहरे भुगतान ने विभागीय कार्यशैली की पोल खोल दी है।
यह मामला सीधे-सीधे सरकारी धन के दुरुपयोग और जिम्मेदारों की लापरवाही की ओर इशारा करता है। संबंधित अधिकारियों एडीओ पंचायत और बीडीओ को कर्मचारी की मृत्यु की जानकारी तक नहीं हुई या फिर लापरवाही के चलते कार्रवाई नहीं की गई। अब जाकर मामला सामने आने पर मृतक के पुत्र को नोटिस जारी किया गया है। गड़बड़ी करने वाले जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
खेली सफाई कर्मियों की मॉनीटरिंग की पोल
ग्राम पंचायतों पर सफाई कर्मियों के कार्यों की मॉनीटरिंग करने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। ग्राम, ब्लॉक सहित जिला स्तर के अधिकारी, कर्मचारी उनके कार्यों का निरीक्षण करते हैं। साथ ही ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी के सत्यापन के बाद ही कर्मचारी का वेतन जारी किया जाता है। जब कर्मचारी छह महीने तक गांव में नहीं आया तो कैसे उसकी हाजिरी लगती रही और किस तरह सत्यापन कर दिया गया? इस मामले ने पोल खोल दी है कि ये सब सरकारी व्यवस्थाएं दिखावा ही हैं।
वर्जन
मृत सफाईकर्मी का वेतन निकलने का मामला संज्ञान में आया है। नौकरी पाने वाले उसके पुत्र गोविंद को नोटिस दिया गया है। जल्द ही उससे मृत सफाई कर्मी के खाते में भेजी गई वेतन धनराशि की रिकवरी कराई जाएगी। मामले की विभागीय जांच भी की जा रही है। -मोहम्मद राशिद, डीपीआरओ