पैथॉलॉजी में चल रहा खून खींचने का खेल
- गली-गली में खुली हुई हैं अवैध ब्लड बैंक और पैथॉलॉजी
- एक पंजीकृत ब्लड बैंक, लेकिन कई जगह निकाला जा रहा रक्त
अमर उजाला ब्यूरो
एटा। जिले में पैथॉलॉजी की आड़ में खून खींचने का खेल चल रहा है। खून माफिया नशेड़ियों को 200-200 रुपये में पकड़कर खून खींचते हैं और उसे मरीजों को चढ़ाया जाता है। आलम यह है कि जिले में कई जगहों पर अवैध पैथॉलॉजी खुली हुई हैं, जहां लोगों को खून चढ़ाया जाता है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की नजर इस ओर नहीं है।
जिले में स्वास्थ्य विभाग में महज चार पैथॉलॉजी और एक ब्लड बैंक पंजीकृत हैं। मगर यहां हर गली में पैथॉलॉजी खुली हुई हैं। इनकी आड़ में अवैध रूप से खून खींचने और चढ़ाने का काम होता है। एक माफिया ने तो घर में ही खून खींचने और चढ़ाना शुरू कर दिया है। यहां रोजाना करीब 20 लोगों को खून चढ़ाया जाता है। विभागीय अधिकारियों की इनकी जानकारी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ भी नहीं होता। पहले भी जिले में अवैध ब्लड बैंक का भंडाफोड़ हो चुका है, लेकिन माफिया पर कार्रवाई नहीं होती। अनदेखी के चलते खून माफिया मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।
यहां संचालित होता है गोरखधंधा
शहर में पटियाली गेट, शिकोहाबाद रोड, प्रेमनगर, अवंतीबाई नगर, महाराणा प्रताप नगर, पीपल अड्डा, किदवई नगर, शांति नगर जमकर पैथोलॉजी की आड़ में खून खींचा जा रहा है।
ऐसे होता है खेल
पैथॉलॉजी संचालकों का डॉक्टरों से संपर्क रहता है। अधिकतर झोलाछाप इनके संपर्क में रहते हैं। झोलाछाप मरीज को खून की कमी बताकर डरा देते हैं। इन मरीजों को डॉक्टर खून माफिया का पता बता देते हैं और माफिया बिना जांच के ही खून चढ़ाकर सेहत से खिलवाड़ करते हैं। इसके एवज में मरीजों को जमकर लूटा जाता है। कुछ मरीज तो ऐसे हैं जो एनीमिया से पीड़ित हैं और उनको हर महीने खून की जरूरत होती है। इनको महंगे दामों पर खून मुहैया कराया जाता है।
दबा दिए जाते हैं मामले
शहर के माया पैलेस चौराहा स्थित एक अस्पताल में मंगलवार रात को खून चढ़ाने का मामला सामने आया। सूत्र बताते हैं कि पुलिस ने अस्पताल से तीन लोगों को उठाया था। सुबह मामले की जानकारी हुई तो मरीज और अस्पताल संचालक में समझौता कराकर तीनों लोगों को छोड़ दिया गया। बताया जाता है कि अस्पताल में दो यूनिट खून से तीन बोतलें बनाई जा रही थीं।
पहले हो चुका है भंडाफोड़
शहर में दो साल पहले एक पैथॉलॉजी पर अवैध ब्लड बैंक चलती हुई मिली थी। जिसमें पैथॉलॉजी संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। आज तक संचालक पकड़ा नहीं जा सका। कागजों में संचालक फरार है, जबकि वह फिर से पैथॉलॉजी चला रहा है।
स्वास्थ्य विभाग में बैठता है माफिया
शहर का एक और बड़ा खून माफिया स्वास्थ्य विभाग के दफ्तर में ही घूमता है। इसके खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज है, लेकिन पुलिस आज तक गिरफ्तारी नहीं कर सकी।
कोई भी पैथॉलॉजी संचालक व हॉस्पिटल संचालक अपने यहां खून निकालकर नहीं चढ़ा सकता। इसके लिए जिला अस्पताल की ब्लड बैंक ही अधिकृत है। अगर ऐसा हो रहा है तो यह गलत है और कारवाई की जाएगी।
डॉ. एके अग्रवाल, सीएमओ, एटा।