जल स्तर बढ़ाने के लिए शासन ने खेतों के बीच तालाब जैसे गहरे गड्ढे खोदने की योजना तैयार की है। मनरेगा से इस योजना पर धन व्यय किया जाएगा। खेतों के बीच जो गड्ढे खोदे जाएंगे उसे फार्म पांड्स नाम दिया है।
पूरे प्रदेश से भूगर्भ जल स्तर गिरने और जल संकट की रिपोर्ट मिलने के बाद अब शासन ने जिले में फार्म पांड्स (खेतों के बीच खोदे जाएंगे गहरे गड्ढे) खोदने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने मनरेगा योजना से खेतों में तालाब खोदने के लिए प्रेरित किया है। मनरेगा से किसानों के खेत में 15 फीट गहरे गड्ढे खोद कर उन्हे इस प्रकार तैयार किया जाएगा कि बारिश का पानी गड्ढों में जमा हो। जमा पानी को किसान सिंचाई के काम में लाने के अलावा खेतों में नमी वापस आएगी और वाटर लेवल भी बढ़ेगा। मनरेगा से खोदे जाने वाले इन गड्ढों को शासन ने फार्म पांड्स का नाम दिया है। किसान की सहमति पर ही उसके खेत में गड्ढे खोदे जाएंगे। इस कार्य को वित्तीय वर्ष 2016-17 की कार्ययोजना में शामिल कर लिया गया है। मनरेगा के अपर आयुक्त पिंकी जावेल का कहना है कि यदि कोई किसान तालाब खुदवाता है कि तो उसका अधिकतम भुगतान 1.59 लाख रुपये तक किया जाएगा। मनरेगा उपायुक्त एमएन त्रिवेदी का कहना है कि योजना उन इलाकों के लिए है जहां भूमि ऊबड़-खाबड़ है। किसानों का तलाब खुदवाने के लिए जागरूक किया जाएगा। खेत में गड्ढे खोदे जाने से भूगर्भ जल स्तर की वृद्धि में काफी मदद मिलेगी। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार इस बार बेहतर बारिश के आसार है। ऐसे में यदि मनरेगा के तहत तालाब खोदे जाते हैं तो वे जल संचय के लिए बेहतर विकल्प साबित होंगे।
मनरेगा अपर आयुक्त पिंकी जावेल ने मनरेगा उपायुक्त एमएन त्रिवेदी को एटा जिले में 180 पुराने तालाब, 150 स्थानों पर मेड़बंदी और बर्मी कंपोस्ट (केचुए खाद) के 2310 गड्ढे खोदने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा मनरेगा योजना के तहत जिले में पौधरोपण के लिए 1,50,600 गड्ढे प्राथमिकता के आधार पर खोदने को कहा गया है।
तहसील तालाबों की संख्या अतिक्रमण
अलीगंज 363 70 से अधिक पर
जलेसर 310 02 से अधिक पर
एटा सदर 638 90 से अधिक पर
जिले के 1311 तालाबों से 900 तालाब सूखे पड़े हैं। पिछले साल मुख्यमंत्री जल बचाओ अभियान के तहत जिले में 248 तालाब खोदे गए, लेकिन उनमें नहराें, निजी एवं सरकारी नलकूप से पानी भरवाने की कवायद अब शुरू हुई है। जिले में 162 तालाबों पर अतिक्रमण हैं।