विकास खंड शीतलपुर के गांव शाहपुर में शनिवार रात किसान विजय सिंह (50) की
फसल बर्बाद देख सदमा लगने से मौत हो गई, जबकि प्रशासन बीमारी से मौत होना
मान रहा है। दूसरी ओर जिला प्रशासन ने बर्बाद किसानों के आंसू पोंछने के
लिए 24 करोड़ 70 लाख रुपये की मांग राज्य सरकार से की है। सबसे ज्यादा
ओलावृष्टि से जलेसर क्षेत्र के किसान बर्बाद हुए हैं। वहीं लेखपाल आकलन कर
रहे हैं। दूसरी ओर किसान रही सही फसल को बचाने में जुटा है। खेतों में
गेहूं की कटाई हो रही है।
दो दिन पहले फिर हुई बारिश और जलेसर क्षेत्र में ओलावृष्टि होने से
किसान सड़क पर आ गया है। अपनी फसल को बर्बाद देख जिले में अब तक सात
किसानों की मौत हो चुकी है, लेकिन प्रशासन ने एक भी किसान की मौत सदमा लगने
से नहीं, बल्कि बीमारी के चलते होना माना है। शनिवार की रात 11 बजे गांव
शाहपुर निवासी किसान विजय सिंह की भी सदमा लगने से मौत हो गई। किसान ने चार
बीघा खेत में गेहूं की फसल बोई थी जो बरसात से खराब हो गई। रविवार की सुबह
जानकारी मिलने पर लेखपाल सुरेश पहुंचे और जानकारी की। लेखपाल का कहना है
कि किसान की मौत बीमारी से हुई है। फिर भी जांच की जा रही है।
दूसरी
ओर, डीएम निधि केसरवानी ने ओलावृष्टि से फसलाें के हुए नुकसान का शनिवार को
जायजा लिया था। आकलन कर प्रशासन ने राज्य सरकार से 24 करोड़ 70 लाख रुपये
की मांग की है। एडीएम वित्त राजेंद्र कुमार ने बताया कि फसलों को 50
प्रतिशत से ज्यादा का नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि होने से जलेसर क्षेत्र में
20 हजार हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। यहां के पीड़ित किसानों को 18 करोड़
रुपये की सहायता दी जाएगी। एटा तहसील क्षेत्र में 5160 हेक्टेयर में फसल
को नुकसान पहुंचा है। यहां के लिए चार करोड़ 60 लाख, तहसील अलीगंज क्षेत्र
में 1300 हेक्टेयर में फसल बर्बाद हुई है। यहां के लिए एक करोड़ 30 लाख
रुपये की मुआवजा राशि किसानों को बंटेगी। उन्होंने बताया कि नौ हजार रुपये
प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा राशि मिलेगी।
राज्य सरकार से
प्रशासन ने धनराशि की मांग की है। लेखपाल गांव वार जा रहे हैं और किस किसान
को कितना नुकसान हुआ है उसकी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। रिपोर्ट मिलने पर
संबंधित किसान को मुआवजा राशि दी जाएगी।
- राजेंद्र कुमार, एडीएम