शनिवार रात से फिर बदले मौसम के मिजाज से किसान सहम गए हैं। रात को आई आंधी
से खेत में कटी पड़ी गेहूं की फसल और भूसा उड़ गया। वहीं होर्डिंग्स भी
गिर गए। कुछ देर के लिए बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई। हल्की बूंदाबांदी
हुई, लेकिन रविवार सुबह आसमान में काले बादल छाए देख किसानों ने जल्द गेहूं
की फसल को समेटने की कवायद शुरू कर दी। शाम के समय अवागढ़ में जहां जोरदार
बारिश हुई, वहीं कस्बा बसुंधरा और आसपास के गांवों में 10-15 मिनट तक ओले
पड़े। यह ओले तीन से चार ग्राम के थे जो बरसात के साथ ही घुल गए।
जख्म देने के बाद भी मौसम की बेरुखी किसानों का पीछा नहीं छोड़ रही है।
शनिवार रात से बदले मौसम ने एक बार फिर किसानों की सांस थाम दी हैं। बारिश
और ओलावृष्टि से भारी नुकसान झेल चुका किसान अब और नुकसान झेलने का बचाव
करने में जुट गया है। गांव देहात में कैसे भी किसान जल्द से जल्द अपनी
गेहूं की फसलों को काटकर उनकी थ्रेशिंग कर रहा है, और अनाज को घर ले जाने
की कोशिश करने लगा है। किसानों की मानें तो तेज बरसात और अधिक नुकसान कर
सकती है। दूसरी ओर, रविवार शाम पांच बजे जहां शहर में घने काले बादल छा गए,
वहीं कस्बा अवागढ़ में जोरदार बारिश शुरू हुई जो लगभग पौन घंटे तक चली।
इसके साथ ही हल्की बूंदाबांदी चल रही है। तेज हवाएं चलने, बिजली कड़कने के
साथ हो रही बारिश के चलते बाजारों में भी सन्नाटा छा गया। वहीं कस्बा
बसुंधरा व आसपास के गांवाें में छोटे-छोटे ओले पड़े जो बारिश के साथ ही गल
गए। बरसात व ओले पड़ने से किसान परेशान हैं। खेतों में पड़ा गेहूं भी भीग
गया है। जलेसर में बारिश के चलते दर्जनों स्थानों पर कई पेड़ गिर गए। खेतों
में पानी भर गया।
दीवार गिरने से मां-बेटी घायल
जलेसर। सायं के समय हुई जोरदार बारिश व तेज हवाओं के चलते जलेसर के गांव शाहनगर टिमरूआ में कई घरों की टीन शैड उड़ गईं। वहीं गांव के ही पूरन सिंह के मकान के दूसरी मंजिल की एक दीवार गिर पड़ी, जिससे बराबर में ही बने छोटे भाई मेघ सिंह की नीचे बैठी पत्नी शांति देवी (50) व विवाहिता पुत्री नीरज (20) गंभीर रूप से घायल हो गईं। लोगों ने दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया।
सूखे से खरीफ, बारिश से रबी की फसल बर्बाद
दो साल से आपदा की पीड़ा झेल रहा किसान कराह उठा है। खरीफ की फसल सूखे के कारण प्रभावित हुई थी, सूखे के नुकसान की भरपाई रबी की फसल से करने की उम्मीद किसानों को थी। इसके लिए रबी की फसल का किसानों ने रकबा भी बढ़ा दिया, लेकिन ओलावृष्टि और बरसात ने रबी की फसल को भी तबाह कर दिया।
जिले में 40 प्रतिशत किसान खरीफ फसलों की बुवाई भी नहीं कर पाया, जिन 60 प्रतिशत किसानों ने फसल बोई, उनके घर 50 प्रतिशत अनाज भी नहीं पहुंचा। शासन ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया। वहीं रबी की फसल को जहां बरसात व ओलावृष्टि ने धो दिया, वहीं खरीफ फसल के लिए किसानों को सूखे की मार से फसल सींचना भी दूभर हो गया। कृषि विभाग की मानें तो खरीफ फसल के लिए शासन से निर्धारित अच्छादन क्षेत्र का जिले में 60 प्रतिशत भाग में भी फसलों की बुवाई बमुश्किल हो पाई थी। किसान सूखा राहत का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर गेहूं की फसल में हुए नुकसान को लेकर शासन से किसानों को जो मुआवजा दिया जा रहा है, वह भी किसानों के जख्मों पर मरहम नहीं लगा पा रहा है।
जर्जर लाइन के फॉल्ट से खराब हो रही फसलेें
किसानों को पहले कुदरत की मार पड़ी, अब किसानों की कटी हुई गेहूं की फसल जर्जर लाइन में हो रहे फॉल्ट से राख हो रही है। लगातार हुई आग की घटनाओं ने किसानों के अरमानों को भी जला दिया है। फसल में आग लगने की घटनाएं बीते सप्ताह से काफी बढ़ी हैं। अब तक की सभी घटनाओं में अग्निशमन के दावे पूरी तरह से फेल साबित हुए। विभाग पर आग बुझाने के लिए स्टाफ और न पर्याप्त संसाधन हैं।
पहले खरीफ की फसल में सूखे की मार, इसके बाद रबी की फसल में बरसात और ओलावृष्टि की मार ने किसानों को तबाह कर दिया। अब बिजली विभाग की बेहाल व्यवस्थाएं भारी पड़ रही हैं। बीते सप्ताह जिले में कई क्षेत्रों में गेहूं की कटी हुई फसलों को आग ने राख कर दिया। इसका जिम्मेदार पीड़ित किसानों ने विभाग को ठहराया है।
फसल में आग लगने की घटनाएं
- 10 अप्रैल को जैथरा के गांव अमृतपुर में वीरेंद्र सिंह की दो बीघा गेहूं की फसल जली
- 8 अप्रैल को गांव नगला गजपत में भंवरपाल की दो बीघा गेहूं की फसल जली
- 10 अप्रैल को मिरहची गांव फतेहपुर माफी में नवल किशोर की तीन बीघ गेहूं की फसल जली
- 8 अप्रैल को कस्बा राजा का रामपुर में लल्लन पांडेय की ढाई बीघा गेहूं की फसल जली
- 10 अप्रैल को अलीगंज गांव कंचनपुर में सौदान सिंह की दो बीघा फसल जली
विभाग के पास मौजूद संसाधन
संसाधन मौजूद आवश्यकता
बढ़ी गाड़ी 02 04
छोटी गाड़ी 02 03
पंप 05 05
विभाग के पास स्टाफ का भी टोटा
अगिभनशमन विभाग के पास अधिकारियों और कर्मचारियों का टोटा है। विभाग में जहां एफसीओ का पद काफी समय से रिक्त पड़ा है, वहीं तीन फायर मैन के पद भी रिक्त पड़े हैं।
यह सच है कि अगिभनशमन विभाग के पास संसाधनों की कमी है। इसके बावजूद विभाग आग की घटनाओं पर समय से काबू पाने की पूरी कोशिश करता है। घटना पर समय से पहुंचने के लिए सही रोड और घटना स्थल की दूरी पर निर्भर करता है।
- जगदीश नारायण दोहरे, सीएफओ
बैंक नहीं दे रहे दुर्घटना बीमा की जानकारी
मारहरा। प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे किसानों के साथ स्थानीय बैंक भी छल कर रहीं हैं। ऋणधारी किसानों से दुर्घटना बीमा का प्रीमियम एडवांस में काटने वाले अधिकारी भी इसकी जानकारी किसानों को पूरी नहीं देते। क्रेडिट कार्ड धारक हजारों किसानों को भी इसकी जानकारी नहीं है। जबकि केसीसी प्रपत्र भरवाते समय बैंक अधिकारी आवेदक किसानों से इस प्रपत्र पर हस्ताक्षर करा लेते हैं और खाते से डेबिट कर लेते हैं। किसान भीकम सिंह, भागवती, गेंदालाल, भगवान सिंह, श्यामलाल, राकेश सिंह आदि के अनुसार जानकारी के अभाव में पीड़ित परिवार इसका लाभ नहीं ले पा रहे।
क्या है बैंकों का प्रीमियम
बैंक वार्षिक प्रीमियम
केनरा बैंक 99 रुपये
ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त पांच रुपये
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया छह रुपये
एसबीआई 100 से पांच सौ तक का प्रीमियम वसूल रही
बैंकों द्वारा दुर्घटना बीमा प्रीमियम वसूलने के बाद भी जानकारी न देना किसानों के साथ अन्याय है। इस संबंध में लीड बैंक प्रबंधक को पत्र लिखकर अवगत कराया जाएगा। ताकि किसानों को उनका हक मिल सके।
- डा. सर्वेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी