नौ माह के शिक्षा सत्र में 12 महीने की फीस को लेकर विरोध हो रहा है। शिक्षार्थियों अभिभावकों का कहना है कि एक अप्रैल से जब नया सत्र शुरू हो रहा है तो फिर विद्यालय संचालक जून तक की फीस क्यों वसूल रहे हैं?
बदला शिक्षा सत्र व्यवस्थाओं के आड़े आ रहा है। पढ़ाई के हिसाब से जहां वर्तमान शिक्षा सत्र सबसे छोटा मात्र नौ माह का रहा। क्योंकि जुलाई से शुरू हुआ सत्र 31 मार्च को पूरा हो रहा है। वहीं, छात्र-छात्राओं से शुल्क जून तक का वसूला जा रहा है। जो नौ माह के सत्र से तीन माह अतिरिक्त है। यद्यपि शुल्क वसूली को लेकर कोई दिशा निर्देश न मिलने से प्रधानाचार्य शिक्षकों में असमंजस है। वहीं, विद्यार्थियेां-अभिभावकों में असंतोष है। वे भी इसे अव्यहारिक बताकर विरोध जता रहे हैं।
ये है मामला
जुलाई से जून तक चलने वाले शिक्षा सत्र में शुल्क जुलाई से जून तक का लिया जाता था। लेकिन वर्तमान सत्र जुलाई से मार्च तक का है। ऐसे में शुल्क सत्र का ही तो देय होगा। लेकिन संस्थाएं सत्र से तीन माह अधिक (अप्रैल, मई व जून) की भी फीस वसूल रही हैं। जबकि यह माह नए सत्र की पहली तिमाही होंगे। जिनका शुल्क अगले सत्र में भी वसूला जाएगा। ऐसे में बच्चों को तीन महीनों की दोहरी फीस वसूली जाएगी।
मार्च तक के शिक्षा सत्र में जून तक की फीस बसूलना अव्यवहारिक ही नहीं अनुचित भी है। सैकड़ों रुपए प्रतिमाह का शुल्क लेने वाले निजी स्कूल धड़ल्ले से वसूली कर रहे हैं। इससे अभिभावकों का आर्थिक शोषण बढ़ रहा है।
- महावीर सिंह यादव, अभिभावक, एटा
शुल्क वसूली को लेकर असमंजस है। संस्थाओं को स्पष्ट विभागीय दिशा-निर्देशों का इंतजार है। ताकि नियमानुसार अनुपालन किया जा सके।
- अनोखे सिंह यादव, प्रधानाचार्य, डीएवी इंटर कालेज सकीट, एटा