कांशीराम आवासीय कालोनियों के बाशिंदे समस्याओं से जूझ रहे हैं। यहां ट्रांसफार्मर हैं, लेकिन महीनों से फुंके पडे़ हैं। सफाई कर्मचारी नहीं आने कारण कालोनी में कूड़े और गंदगी के ढेर लगे हैं। आधे घरों में महीनों से बिजली नहीं है। पेयजल की टंकियां बंद पड़ी हैं। पानी का संकट है।
बसपा सरकार में पांच स्थानों पर 1500 कांशीराम आवास बना कर वर्ष 2008 में आवंटियाें को सौंपे थे। मंगलवार को अमर उजाला टीम ने इन कालोनियों में सुविधाओं की पड़ताल की तो हालात बदतर दिखाई दिए। ट्रांसपोर्ट नगर के पास और सैय्यद कालोनी के पास स्थित कांशीराम आवास निवासी दिलावर, राजेश, आशीष, बाबा, सतीश ने बताया कि बसपा सरकार में यहां व्यवस्थाएं चाक चौबंद रहती थीं। पुलिस कालोनी में राउंड लेती थी। अब तो चोरी वारदात की शिकायत करने पर पुलिस से गालियां मिलती हैं। दिलावर और चंद्रेश ने बताया कि कालोनी में आठ ट्रांसफार्मर लगे हैं, लेकिन चार महीनाें से फुंके पड़े हैं। दलालों को ट्रांसफार्मर लगवाने के लिए चंदा दिया गया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। कालोनी के आधे घरो में महीने से अंधेरा है। पार्क जर्जर हालत मेें हैं तो नालियां और सीवर गंदी से पटे पड़े हैं। स्थानीय लोगों की माने तो दलालों के माध्यम से सुविधा शुल्क लेकर पालिका के सफाई कर्मचारी बुलाए तो वे कालोनी के बाहर से कूड़ा उठाकर चले गए। कालोनी में सात हैंडपंप हैं, लेकिन आधे महीनों से खराब पड़े हैं। जल निकासी के लिए कई बार आंदोलन किए, लेकिन प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं हुई। जलभराव से बदबू फैल रही है।