जिले की नहरों और रजबहों में पानी होली के बाद से बंद है। इससे रजबहे पूरी तरह सूख चुके हैं। सिंचाई विभाग के अफसर पानी बंद करने के पीछे खेतों में तैयार खड़ी गेहूं की फसल को बर्बाद होने से बचाना बता रहे हैं, जबकि धान बुवाई की तैयारी मे जुटे किसानों को नहरों और रजबहों में पानी आने का इंतजार है। वहीं किसान बारिश होने का भी बेसब्री से इंतजार हैं।
जिले मे नहरों और रजबहों की संख्या 69 है। कुल लंबाई 666 किमी है। इन नहरों में पानी असतपुर, सिकंदराराऊ और अलीगढ़ से छोड़ा जाता है, लेकिन इस बार होली से पहले नहरोें में पानी बंद होने से रजबहे पूरी तरह सूख चुके हैं। इससे जायद फसलों की सिंचाई और धान रोपाई के लिए खेतों की तैयारी प्रभावित हो रही है। अफसरों का कहना है कि 25 अप्रैल तक गेहूं का उठान खेतों से होने के बाद नहरों में पानी छोड़ दिया जाएगा। वहीं रजबहे और नहरें सूखने से किसानों को बारिश होने का बेसब्री से इंतजार है।
नहरों के पानी से भरे जाएंगे 137 तालाब
सिंचाई विभाग के अफसरों ने बताया कि जिले में नहरों और रजबहों के किनारे स्थित तालाबों को भरा जाना है। जिन तालाबों को नहर के पानी से भरा जाना है, उनकी संख्या 197 है। विभाग का दावा है कि नहर के पानी से तालाब भरने से इलाके में भूगर्भ जल स्तर बढ़ने से जिले के विभिन्न इलाकों में लगे नलकूप, हैंडपंप रीबोर नहीं कराने पड़ेंगे। किसानों को सिंचाई का पानी भी उपलब्ध होगा।
क्या कहते हैं सिंचाई विभाग के अफसर
25 अप्रैल के आसपास नहरों में पानी छोड़ दिया जाएगा। गेहूं की फसल के कारण होली पर पानी बंद किया गया था। जिले के ऐसे तालाब जो नहरों के किनारे हैं और सूख चुके हैं। उनमें नहरों से पानी भरा जाएगा।
राम किशन
एक्सईएन
सिंचाई विभाग एटा