सुकमा नक्सली हमले में शहीद किशनपाल सिंह का अंतिम संस्कार बुधवार को होने के बाद गांव में चूल्हे नहीं जले हैं। शहीद के घर और गांव में सन्नाटा है। महिलाएं शहीद की पत्नी, ग्रामीण और रिश्तेदार पिता रनवीर सिंह को ढांढस बंधा रहे हैं। शहीद के परिवार को सांत्वना देने वालों का तांता लगा है। शहीद के भाईयों ने गांव के प्राथमिक और जूनियर स्कूलों का नाम बदल कर शहीद केपी सिंह के नाम पर रखने की मांग जिला प्रशासन से की है। एसडीएम एनपी पांडेय के आदेश पर गुरुवार को लेखपाल ने नगला दांडी में अंतेष्टि स्थल के लिए भूमि की पैमाइश की है।
सुकमा नक्सली हमले में शहीद किशनपाल सिंह का अंतिम संस्कार होने के बाद से गांव में माहौल गमगीन है। गुरुवार को गांव की गलियों में सन्नाटा दिखाई दिया। परिवार को सांत्वना देने के लिए रिश्तेदारों और ग्रामीणों का तांता लगा है। जवान बेटे के पार्थिव शरीर को कंधा देने के गम में पिता रनवीर सिंह के मुंह से बोल नहीं फूट रहे। ग्रामीणों ने बताया कि रनवीर किसी जान पहचान और रिश्तेदार से बात नहीं कर रहे। केपी सिंह की चर्चा करने पर वो हाथ हिला कर उत्तर दे रहे हैं। ग्रामीण और रिश्तेदार बुजुर्ग पिता को ढांढस बधाने में लगे हैं। वहंी शहीद की पत्नी सरोज के मुंह में तीन दिन से निवाला नहीं गया है। वो सिर्फ पानी पीकर समय काट रही है और पति की शहादत के बाद अपने भविष्य को लेकर चिंता उसे कचोट रही है।