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नारी अपनी शक्ति को पहचाने और आगे बढ़े

Sun, 04 Sep 2016 11:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
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नारी सम्मान संगोष्ठी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिन देशों ने महिलाओं की भागीदारी बढ़ी, वही आज विकसित देशों की श्रेणी में खड़े हैं। योजनाएं इंतजार कर रही हैं, जरूरत अपनी शक्ति को पहचान, आगे बढ़ने की है। तरक्की की नई राहों पर शिक्षा, सम्मान और सुरक्षा का मंत्र उन्हें मंजिल तक पहुंचाएगा। ये निष्कर्ष था अमर उजाला और प्रदेश सरकार की साझा पहल पर रविवार को आयोजित नारी सम्मान संगोष्ठी में हुए मंथन का। संगोष्ठी में महिलाओं को योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी गई। बताया गया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही महिलाओं को सम्मानित किया जाएगा, ताकि उनका हौसला बढ़े। 
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प्रभुपार्क स्थित रानी लक्ष्मीबाई कम्युनिटी हॉल में आयोजित नारी सम्मान संगोष्ठी का शुभारंभ जिलाधिकारी के. विजियेंद्र पांडियन, एसपी सुनील कुमार सिंह व अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। जिलाधिकारी ने कहा कि परिवार में महिलाओं के प्रति भेदभाव खत्म करके शिक्षा एवं उद्यमिता के  जरिए उन्हें आगे बढ़ाना होगा। महिलाएं स्वयं हौसले के साथ आगे बढ़ें। इसके लिए सरकार की तमाम योजनाएं चल रही हैं।
पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार सिंह ने कहा कि नारी सम्मान के लिए स्वयं महिलाएं सजग रहें। उन्होंने प्रदेश सरकार की 1090 वूमेन पावर लाइन और पावर एंजल योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी दिक्कत के समय में महिलाएं इस सेवा का लाभ उठाएं।
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मुख्य विकास अधिकारी श्रीनिवास मिश्र ने कहा कि आज महिलाओं की भागीदारी कम होने के कारण ही हम विकासशील देशों की श्रेणी में खड़े हैं। भारत के साथ ही कई और देश भी आजाद हुए। लेकिन  जिन देशों में महिलाओं की भागीदारी अधिक हुई, वही देश विकसित हो गए।
अपर जिलाधिकारी सुरेंद्र कुमार ने कहा कि  महिलाएं अपनी शक्ति को पहचाने और आगे बढ़ें। महिलाओं के लिए चलाई जा रही प्रदेश सरकार की योजनाएं उनकी राह को आसान बना रहीं हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गीता वर्मा ने कहा कि परिवार में संस्कार का आधार मजबूत होना चाहिए औरर ये कार्य महिलाएं ही कर सकती हैं।
कार्यक्रम में एलईडी के माध्यम से महिलाओं को प्रदेश सरकार की योजनाओं एवं कराए गए विकास की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का संचालन भजन गायक प्रशांत भारद्वाज ने किया। बाल भजन गायिका श्रीजी भारद्वाज ने नारी शक्ति को समर्पित रचना प्रस्तुत कि लड़के की तरह लड़कियां भी मुट्ठी बांधकर पैदा होती है। 

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की संचालिका सरोज बहन ने कहा कि भारत में आदि काल से नारियों के सम्मान की परंपरा है, जब से मर्यादाएं महिलाओं ने लांघी है तभी से दुराचार, व्याभिचार बढ़ा है। शिक्षित होकर महिलाएं खुद की सुरक्षा कर सकेंगी और उन्हें सम्मान भी मिलेगा।
आर्ट लिविंग की शिक्षिका सरोज अग्रवाल ने कहा कि महिलाएं अपने अंत:कर्ण को श्रेष्ठ बनाएं और तनाव से दूर रहे हैं। महिला ही परिवार की पहली शिक्षक है। जब परिवार में संस्कारों की शिक्षा बच्चों को मिलेगी तो समाज को संस्कारी पीढ़ी मिलेगी। 
 शिक्षिका विनय यादव ने कहा कि महिलाएं कमजोर नहीं हैं। वह आज भी शक्ति का पुंज हैं। वे खुद की रक्षा करने में सामर्थ हैं लेकिन जागरूक नहीं। जिस दिन महिला अपनी शक्ति को पहचान लेंगी उन्हें बराबरी का हक मिलने लगेगा।
शिक्षिका ज्योत्सना सिंह सोलंकी ने कहा कि महिलाएं शिक्षा में पिछड़ी हुई हैं, लेकिन समाज में बदलाव आ रहा है। महिलाएं शिक्षा की ओर बढ़ रही हैं। महिलाओं के शिक्षित होने से कई समस्याएं स्वत: कम हो जाएंगी।
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