पूरे जिले में धड़ल्ले से पॉलीथिन का प्रयोग हो रहा है। लोग सामान खरीदने के लिए घर से थैला लेकर नहीं निकलते। चाहे सब्जी हो या फिर खानेपीने की वस्तु के अलावा अन्य कोई सामान। सब पॉलीथिन में ही रखा दिखाई देता है। दूसरी ओर, लोग सामान आदि निकालकर पॉलीथिन को सड़क पर ही फेंक देते हैं, जिसे आवारा पशु खाते हैं जो उनके लिए घातक है। वहीं नाले नालियों भी चोक हो रही हैं। इससे जाम हो रहे हैं और पानी की निकासी न होने के चलते जलभराव आदि हो रहा है। नालों की सफाई के दौरान यह पॉलीथिन निकलकर बाहर आ रही हैं।
पूर्व में तत्कालीन डीएम लोकेश एम ने पॉलीथिन के खिलाफ अभियान चलाया था लेकिन दो-चार दिन ही यह अभियान चला। आज स्थिति यह है कि चाहे हथठेला वाला हो या फिर दुकानदार। हर जगह सामान पॉलीथिन में ही दिया जाता है, न तो दुकानदार ग्राहक से जूट का थैला घर से लाने को कहता है और न ही ग्राहक पॉलीथिन में सामान लेने से मना करता है। इसलिए इसका धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है।
पॉलीथिन का प्रयोग बंद कराए जाने के लिए पालिका एक-दो दिन में अभियान शुरू करने जा रही है। इसके लिए एक टीम बनाई गई है जो पुलिस फोर्स के साथ सबसे पहले थोक विक्रेताओं के यहां छापा मार पालीथिन जब्त करेगी।
नगरपालिका अध्यक्ष, राकेश गांधी