मिशन शक्ति के तहत बौद्धिक अशक्तजनों के भविष्य की सुरक्षा को लेकर सरकार नया कदम उठाने जा रही है। उनकी सुरक्षा संबंधित जिम्मेदारी के लिए माताओं को विशेष पुलिस अधिकारी बनाया जा रहा है। उसको सम्मानित भी किया जाएगा। जिले में बौद्धिक अशक्तजनों के 1986 परिवार चिह्नित कर गांव-गांव पुलिस टीमें पहुंचकर विशेष पुलिस अधिकारी का प्रमाणपत्र भी सौंपने लगी हैं।
एएसपी क्राइम राहुल कुमार ने बताया है कि बौद्धिक रूप से अशक्त लोगों के साथ अपराध घटित होते हैं। इनको लेकर माता-पिता को बेहद चिंताएं सताती हैं। ऐसे बौद्धिक अशक्तजनों की माताओं को सुरक्षा की जिम्मेदारी देते हुए विशेष पुलिस अधिकारी बनाया जा रहा है।
अब तक इनकी सुरक्षा अदृश्य थी, लेकिन अब सामाजिक रूप से सबके सामने है कि परिवार के साथ पुलिस भी खड़ी हुई है। बौद्धिक अशक्तजनों के माता पिता के न रहने के बाद शारीरिक अंगों को निकालने, जबरन भीख मंगवाने, लैगिंग शोषण, अंतरराष्ट्रीय ड्रग सप्लाई कराने और जमीनों पर अवैध कब्जा जैसे मामले सामने आते रहते हैं। एक वर्ष में डायल 122 पर पांच हजार से भी अधिक कॉल्स आएं हैं। वहीं, महिलाओं व बालिकाओं के साथ दुष्कर्म की तमाम वारदातें होती रही हैं। उन्होंने बताया है कि जिला में 1986 परिवार चिह्नित किए जा चुके हैं। इनके घरों में बौद्धिक निशक्तजन रहते हैं। ऐसे परिवार की माताओं को विशेष पुलिस अधिकारी का प्रमाणपत्र मुहैया कराया जा रहा है।