एटा। बच्चों के मन में राष्ट्र प्रेम की भावना बढ़ाने के लिए जो राष्ट्रगान पढ़ाया जा रहा है, उसमें त्रुटियों की भरमार है। एनसीईआरटी (नेशनल काउंसिल ऑफ एजूकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग) द्वारा जारी कक्षा 3 की कला विषय की पुस्तक (बांसुरी) में प्रकाशित राष्ट्रगान में एक-दो नहीं, 18 त्रुटियां हैं।
नए शैक्षिक सत्र के साथ एनसीईआरटी ने पुस्तकें जारी कर इन्हें अपनी वेबसाइट पर अपलोड भी किया है। कला विषय की हिंदी में प्रकाशित पुस्तक का पाठ 6 हमारा राष्ट्रगान है। इसमें प्रकाशित राष्ट्रगान में सिंध (सिंधु), माँगे (मांगे) और मंगल-दायक (मंगलदायक) शब्द गलत लिखे हुए हैं। तीन जगह तव (तब) शब्द गलत लिखा गया है। 6 योजक चिह्नों की गलतियां हैं। ये सभी चिह्न आदर्श राष्ट्रगान से हटकर अनावश्यक लगाए गए हैं। 3 जगह गलत रूप से अर्द्धविराम और 2 जगह पूर्ण विराम लगाए गए हैं। अंत में पूर्ण विराम के स्थान पर दोहरा पूर्ण विराम प्रकाशित किया गया है।
गृह मंत्रालय से मांगी सूचना, राष्ट्रपति को भेजी शिकायत
इन त्रुटियों को देखकर शहर के अवंतीबाई नगर निवासी शिव कुमार ने पहले गृह मंत्रालय से सूचना मांगी। वहां से उन्हें राष्ट्रगान भेजा गया। इससे मिलान करने पर पुस्तकों में गलतियां पुष्ट हो गईं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति, गृह मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय को इस संबंध में शिकायत भेजी है। बच्चे किताबों से पढ़कर ही सीखते हैं। यदि वहां गलत पढ़ाया जा रहा है तो वह सही को समझ ही नहीं पाएंगे।
कक्षा 3 की इसी विषय की अन्य भाषाओं की पुस्तकों में भी प्रकाशित राष्ट्रगान में त्रुटियां हैं। अंग्रेजी भाषा में तो हिंदी भाषा की पुस्तक को भी पछाड़ दिया है। इसमें कुल 23 त्रुटियां प्रकाशित हैं। अन्य भाषाओं की किताबों का भी यही हाल है।