तीन साल बाद मौनी अमावस्या और सोमवती अमावस्या के दुर्लभ संयोग में गंगा घाटों पर आस्था का महाकुंभ लगा। ठंड भी श्रद्धालुओं के कदम नहीं डिगा पाई। लाखों श्रद्धालुओं ने सुबह जब गंगा स्नान किया तो हर-हर गंगे के जयकारे घाटों पर गूंजने लगे। घंटे, घड़ियाल की आवाज गूंजती रही। स्नान के बाद भक्तों ने मां गंगा की आरती की और घाट पर बने देव मंदिरों में दर्शन कर साधु संतों को दान पुण्य किया।
सोमवार को जिले के जिले के कछला, सोरों हरि की पैड़ी, कादरगंज, लहरा आदि घाटों पर मध्यप्रदेश, राजस्थान और दूसरे जिलों के लाखों श्रद्धालु पहुंचे। देव मंदिरों में दर्शन कर, साधु संतों को दान दक्षिणा देकर पुण्य अर्जित किया। स्नान, पूजा और दान पुण्य का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। कई भक्तों ने मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखा। गंगा स्नान कर मौन व्रत खोला। गंगा घाटों पर मुंडन संस्कार हुए। पितृों की शांति के लिए भी भक्तों ने पूजा पाठ कराए। तीर्थ पुरोहितों ने घाटों पर अनुष्ठान भी संपन्न कराए। महिलाओं ने घाटों पर लगी दुकानों से घरेलू सामान और बच्चों ने खिलौनो की खरीदारी की।
लाखों श्रद्धालुओं के स्नान पर्व के चलते प्रशासनिक व्यवस्था भी चाक चौबंद दिखी। कछला गंगा घाट पर बदायू, कासगंज दो जिले के पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने व्यवस्थाएं बनाई। पार्किंग के लिए घाटों से कई किलोमीटर पहले ही व्यवस्था की। घाटों पर सिविल पुलिस के अलावा महिला पुलिस कर्मियों को भी तैनात किया गया।
प्रशासन के इंतजाम आए काम
इस बार प्रशासन ने गंगा किनारे बांस लगाकर बेरीकेडिंग कर दी और लाउडस्पीकर लगाकर राजस्वकर्मी श्रद्धालुओं को इससे आगे न जाने को चेताते रहे। गंगा में पानी का दबाव अधिक होने पर पीएससी की फ्लड यूनिट भी तैनात रही। प्रशासन ने गंगा में 10 नाव पर 2 गोताखोर 1 चालक की व्यवस्था की। पूर्व में पुल के आसपास हुए हादसों को देखते हुए प्रशासन ने पुल के पिलर पर चेतावनी लिख दी थी।