लोग बुधवार आधी रात जब क्लब व होटलों में नए साल का जश्न मना रहे थे, 56 वर्षीय राधाकृष्ण ने आर्थिक तंगी के चलते जिंदगी से हार मान ली और विद्युत खंभे से फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। मामला गांव जिन्हैरा का है। परिजन का आरोप है, घर में तीन दिन से चूल्हा नहीं जला जिससे राधाकृष्ण ने भूख के चलते आत्मघाती कदम उठाया। गांव पहुंची मिरहची थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और जांच शुरू कर दी है।
छोटे भाई विकास ने कहा, राधाकृष्ण चार भाइयों में सबसे बड़े थे। परिवार की आर्थिक हालत काफी खराब है। पिता लालाराम को बीते छह माह से वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिली है। इस वजह से घर में पैसे नहीं थे और तीन दिन से चूल्हा नहीं जला था। विकास के मुताबिक, दो वर्ष के भीतर राधाकृष्ण को तीन बार पैरालाइसिस का अटैक भी पड़ा था, जिससे मुश्किलें और बढ़ गईं थीं। लगभग छह माह पहले राधाकृष्ण की पत्नी पुष्पा देवी की भी बीमारी से मृत्यु हो चुकी है। एक भाई की भी करीब एक साल पहले बीमारी से मौत हुई थी।
विकास ने बताया कि वह बदायूं में मजदूरी करते हैं और एक भाई दिल्ली में रहता है। माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारी और अपने इलाज के खर्च से राधाकृष्ण पूरी तरह परेशान हो चुके थे। बुधवार को भी जब उन्हें भोजन भी नसीब नहीं हुआ तो निराश होकर आत्मघाती कदम उठा लिया। सीओ सदर संकल्पदीप कुशवाहा ने बताया कि घटना की छानबीन की जा रही है। तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ई-केवाईसी की वजह से नहीं आई 6 माह से पेंशन
राधाकृष्ण के पिता लालाराम ने बताया, ई-केवाईसी न होने से उनकी पेंशन रुक गई थी लेकिन ई-केवाईसी कराने के बाद भी पेंशन नहीं आई। छह माह से पेंशन नहीं मिलने से घर की आर्थिक स्थिति खराब है। विकास ने बताया, पिता की वृद्धावस्था पेंशन से भाई राधाकृष्ण की दवा और घर में खाने-पीने की व्यवस्था हो जाती थी। उन्हें कम दिखाई देता है और उम्र अधिक है तो मजदूरी भी नहीं कर सकते। बेटे को पैरालाइसिस की वजह से दिक्कत थी तो वह भी कुछ नहीं कर पा रहा था। इसी वजह से घर में खाने का राशन तक नहीं बचा।
सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक से बात की गई तो उन्होंने बताया कि पेट के अंदर कुछ लिक्विड व खाना पाया गया है। वास्तविक स्थिति पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगी।