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सावधान: जिले में पांव पसार रहा मलेरिया

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जिला अस्पताल में उपचार कराने को कतार में खड़े मरीज- अमर उजाला - फोटो : ETAH
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एटा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संक्रामक रोग पर रोकथाम के दावे हवा हवाई साबित हो रहे है। बीते तीन माह में जिले में मलेरिया से पीड़ित मरीजों में वृद्धि हुई है। वहीं छह मरीजों में एसएन-वन की पुष्टि हुई है।
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बारिश से पहले स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा संक्रामक रोक पर नियंत्रण करने के निर्देश दिए। बावजूद इसके जिले में बीते तीन माह में मलेरिया से पीड़ित रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग दावा करता है कि संक्रामक रोग पर नियंत्रण करने के लिए लगातार गांवों में फॉगिंग कराई जा रही है। इन सब के बावजूद जिले में छह मरीज डेंगू के वायरस से पीड़ित मिले हैं। इन मरीजों में एनएसवन की पुष्टि हुई है।
प्रधानों से लिए जा रहे प्रमाण पत्र
जिला मलेरिया अधिकारी द्वारा गांव में फॉगिंग कराए जाने पर प्रधान द्वारा प्रमाण पत्र लिया जा रहा है। अब तक आधा सैकड़ा प्रधान ही प्रमाण पत्र दिए है। ऐसे में लगता है कि जिले के अधिकांश गांवों में फॉगिंग ही नहीं हुई है।
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आंकड़ों पर एक नजर
माह---मरीजों का परीक्षण--मलेरिया से पीड़ित
जुलाई--4570--62
अगस्त--6092--70
सितंबर--6987--73
मलेरिया के लक्षण
- अचानक सर्दी लगकर या गर्मी के कारण बुखार आना।
- पसीना के साथ बुखार का कम होना व कमजोरी लगना।
- एक, दो या तीन दिन बाद बुखार का आता रहना।
- घरे में रखे पानी में लार्वा को होना भी मलेरिया का लक्षण है।
मलेरिया से बचाव
- ब्लड का टेस्ट कराकर डॉक्टर की सलाह पर दवा लें।
- मरीज को मच्छरदानी में रखें जिससे उसके बाद अन्य किसी को न काटें।
- मरीज के पास साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें।
मलेरिया की रोकथाम के लिए गांवो में फॉगिंग कराई जा रही है। सभी पीएचसी व सीएससी पर दवाएं भेज दी गई है। गांव- गांव जाकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है।
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डॉ. हरप्रसाद, जिला मलेरिया अधिकारी
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