मारहरा के स्वतंत्रता संग्राम सैनानी नियाज अहमद जुवैरी- अमर उजाला
- फोटो : ETAH
एटा। जंग ए आजादी की मुहिम छेड़ने वाले, अहिंसा का मार्ग दिखाने वाले बापू को पूरे देश ने पिता का दर्जा दिया। जिले के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने भी बापू से प्रेरित होकर आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर योगदान दिया। आंदोलन के अंजाम में काल कोठरी में सजा काटी, लेकिन बापू का पीछा नहीं छोड़ा। आलम यह हुआ कि अंग्रेज जेलर के पूछने पर वल्दियत तक महात्मा गांधी बताई। जिले के एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नियाज अहमद जुबैरी का महात्मा गांधी से गहरा नाता रहा है।
उन्हें महात्मा गांधी की विचारधारा पर ही जीवन गुजारा। मारहरा में जन्मे नियाज अहमद ने महात्मा गांधी के आह्वान पर नमक कानून तोड़ने के आंदोलन में एक साल कारावास की सजा भुगती, लेकिन उत्साह कम नहीं हुआ। भारत छोड़ो आंदोलन में सन 1942 ई. में भी छह माह का कारावास काटा। आज भी लोग गांधी की याद में नियाज अहमद का भी जिक्र करते हैं।
जब जेलर को जड़ दिया थप्पड़
1939 में नियाज अहमद जुबैरी एटा जेल में बंद थे, तो एक हिंदू कैदी को जेलर ने गीता पढ़ने पर ठोकर मार दी। जिस पर नियाज अहमद जुबैरी ने अंग्रेज जेलर को थप्पड़ मार दिया।
खादी से था बड़ा प्रेम
नियाज अहमद के धेवते और मारहरा के पालिकाध्यक्ष वहीद महमूद जुबैरी बताते हैं कि स्वदेशी आंदोलन में उन्होंने पत्नी व घर के सभी लोगों के रेशमी व विदेशी कपड़ों की बीच बाजार में होली जलाई। वह हमेशा खादी के कपड़े पहना करते थे।
आजादी के बाद लगवाई प्रतिमा
देश को आजादी मिलने के बाद मारहरा नगर पालिका में 1951 में महात्मा गांधी की प्रतिमा लगवाई गई। जिसे संरक्षित करने के लिए पालिका प्रयास कर रही है।