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नियम न कानून, चीरते जा रहे काली नदी का सीना

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एटा। काली नदी से बालू खनन का आज तक पट्टा नीलाम नहीं किया जा सका। इसके चलते यहां नियम-कानून का पालन कराने की दिलचस्पी भी नहीं ली गई। सामान्य तौर पर प्रावधान है कि तीन फुट से ज्यादा खनन न किया जाए लेकिन यहां माफिया जेसीबी मशीनें लगाकर आठ से दस फुट गहराई तक बालू निकाल रहे हैं।
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आमतौर पर खनन के लिए पट्टा नीलामी वाले स्थानों पर अफसरों की आंखों में धूल झोंककर या साठगांठ कर शर्तों से अधिक खनन कर लिया जाता है। काली नदी का मामला बिल्कुल ही अलग है। नदी पर खनन के लिए कोई पट्टा नहीं दिया गया है। ऐसे में कोई जितनी भी बालू निकाले, वो सीधे तौर पर अवैध खनन है। रात के समय जेसीबी ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर भारी मात्रा में बालू निकाली जाती है। इसके बावजूद अफसरों और पुलिस को अवैध खनन नहीं दिखता। नदी के किनारे और बीच से आठ से दस फुट गहरे गड्ढे खोदकर बालू निकाल ली जाती है। इन गड्ढों को भरा भी नहीं जाता है जिसके चलते ये खतरनाक बन सकते हैं।
बड़ा उद्योग बन चुका है खनन
एक दशक में काली नदी से अवैध खनन बड़ा कारोबार बन चुका है। इसमें कई लोग शामिल हैं। सरकार को बालू के बदले रॉयल्टी तक नहीं मिलती जबकि खनन माफिया इससे हर माह लाखों रुपये कमा रहे हैं। किनारों से मुफ्त की बालू खोद इसे ज्यादातर सरकारी निर्माणों में लगाया जा रहा है। इसके एवज में अच्छी गुणवत्ता वाली महंगी बालू का भुगतान निकाल लिया जाता है।
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काली नदी से अवैध खनन को बंद कराने के लिए संबंधित एसडीएम और थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा खनन पट्टा नीलामी के लिए भी शुरूआती प्रक्रिया कराई जा रही है।
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- सुनील कुमार सिंह, एडीएम (वित्त एवं राजस्व)
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