एटा में चंद्रग्रहण के चलते मंदिरों के कपाट बंद रहे। तो घरों में भी पूजन
कार्य नहीं हुआ। हनुमान जयंती महोत्सव के कई आयोजन रुके रहे। शाम के बाद जब
सूतक हटे तो हनुमान जयंती की शोभायात्रा निकली और आयोजन हुए।
कासगंज
में ब्रहम महूर्त में पूजा अर्चना के बाद मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए।
देर सांय ग्रहण काल समाप्त होने के पश्चात मंदिरों में पूजा पाठ संपन्न
हुआ। ग्रहण के कारण हनुमान जंयती पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम नहीं हुए।
तीर्थनगरी
सोरों के मंदिरों के पट भी बंद रहे। मंदिरों पर सन्नाटा पसरा था। वहीं नगर
के प्रभूपार्क, चामुंडा मंदिर, पीपलेश्वर मंदिर सहित अन्य प्रमुख मंदिरों
पर सुबह से ही कपाट बंद थे। शनिवार को चंद्रग्रहण का सूतक काल सुबह 3:36
बजे से शुरू हुआ। ग्रहण काल अपरान्ह 3:45 बजे से शुरू हुआ और रात्रि 7:15
बजे ग्रहण काल समाप्त हुआ। ग्रहण काल समाप्त होने के बाद ही मंदिरों में
साफ सफाई के बाद देव मूर्तियों की पूजा अर्चना व आरती भोग के कार्यक्रम
आयोजित हुए। कुछ मंदिरों पर तड़के सुबह सूतक काल से पूर्व हवन पूजा आरती के
कार्यक्रम भी आयोजित हुए। ग्रहण काल के दौरान जगह-जगह लोगों ने घरों पर
भजन कीर्तन के कार्यक्रम आयोजित कर भगवान का स्मरण किया।