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प्रवासी मजदूरों को घर भेजना बन रहा चुनौती

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कासगंज। गुजरात से यूपी के मजदूरों को स्पेशल ट्रेनों से लाया जा रहा है। इन ट्रेनों का व्यवस्थित संचालन न होने से प्रवासी मजदूरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पूर्वांचल के जिलों में रहने वाले श्रमिक भी ब्रज क्षेत्र के कासगंज स्टेशन पर लाए जा रहे हैं। जहां से दूरस्थ इलाके के जनपदों तक प्रवासियों को भेजना बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
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अब तक 5 श्रमिक स्पेशल ट्रेन यहां पहुंच चुकी हैं। पहले समझा जा रहा था कि इन ट्रेनों में कासगंज, एटा, बदायूं जनपद के प्रवासी मजदूर ही होंगे। लेकिन इनमें यूपी के 50 जिलों से ऊपर के प्रवासी निकले तो प्रशासन के सामने बसों से इन्हें दूरस्थ इलाकों तक पहुंचाना टेढ़ी खीर बन गया। यहां के अलावा अन्य डिपो की बसें लगाई गईं। तब जाकर इन प्रवासियों को उनके गृह जनपद तक भेजा गया। रविवार व सोमवार को भी कई डिपो से मंगाई गईं 50 बसों का बेड़ा लगाया गया।
सवाल है कि पूर्वांचल के श्रमिकों को स्पेशल ट्रेन से यदि उनके गृह जनपद या आसपास के स्टेशनों पर पहुंचाया जाता तो प्रशासन को लंबी दूरी तक बस भेजने के लिए कवायद करनी पड़ती। ऐसी स्थिति में प्रवासियों को अतिरिक्त सफर भी नहीं करना पड़ता। गोरखपुर महोबा के रहने वाले मंगल सिंह का कहना है कि यह ट्रेन गोरखपुर या आस पास स्टेशनों पर पहुंचती तो वे जल्द ही घर पहुंचते। इसी इलाके के राकेश पाल का कहना था कि अब उन्हें घर पहुंचने की उम्मीद बंधी है। लेकिन कासगंज में काफी दूर उनकी ट्रेन का स्टॉपेज बनाया गया है। जिससे वापस गोरखपुर पहुंचने में 8-10 घंटे लगेंगे।
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इन डिपो से लाई गईं बसें
अलीगढ़, हाथरस, नरौरा, एटा डिपो की बसें भी मंगाई गईं। कासगंज डिपो के अलावा इन जिलों की बसों को प्रवासी मजदूरों को उनके गृह जनपद भेजने के लिए मंगाया गया।
इन जिलों के आ रहे मजदूर
आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, फतेहपुर, चित्रकूट, जालौन, इटावा, औरया, अलीगढ़, बुलंदशहर, बदायूं, बरेली, शाहजहांपुर, हरदोई, फर्रूखाबाद, कानपुर, अयोध्या, प्रतापगढ़, फतेहपुर, बांदा, चित्रकूट, चंदौली, बनारस, जौनपुर, कुशीनगर, देवरिया, खलीलाबाद, सुल्तानपुर, अमेठी, हाथरस, मैनपुरी, गोरखपुर, बस्ती, संतकबीर नगर सहित तमाम अन्य जिलों के मजदूर कासगंज में श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से आ रहे हैं।
47000 रुपये प्रत्येक बस पर आ रहा खर्च
राज्य सरकार रोडवेज की बसों का संचालन करने के लिए 24 घंटे के लिए 47000 रुपये का किराया प्रत्येक बस के हिसाब से दे रही है। क्षेत्रीय प्रबंधक संजीव कुमार का कहना है कि इस किराए का निर्धारण 24 घंटे के अनुसार किया गया है। इसमें किलोमीटर के अनुसार किराए की कोई गाइडलाइन नहीं है।
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