कासगंज। कोरोना के मद्देनजर किए गए लॉकडाउन ने जिंदगी मुश्किल कर दी है। जिले एवं जिले के आसपास के सीमावर्ती इलाकों के हजारों लोग दिल्ली समेत अन्य दूरस्थ इलाकों से पैदल लौट रहे हैं। घर की डगर पर चलते-चलते पैरों में छाले पड़ गए हैं लेकिन घर की आस में कदम बढ़े जा रहे हैं। रोडवेज की ओर से पैदल आ रहे यात्रियों 70 बसें चलाईं गईं। यह जानकारी एआरएम संजीव कुमार ने दी है।
राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब के शहरों से लगातार लोगों का आने का सिलसिला जारी है। लॉकडाउन के चलते दूर-दराज से आने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई-कई दिन से पैदल चल रहे लोगों के पैरों पर छाले पड़ गए हैं तो कइयों के पास खाने तक के लाले हैं।
हालांकि ऐसे लोगों की मदद के लिए अब प्रशासन के साथ ही समाजसेवी संस्थाएं भी आगे आ रही हैं। दिल्ली, गुरुग्राम, गाजियाबाद आदि इलाकों से जिले में पहुंचने वाले लोगों को समाजसेवी संस्थाएं भोजन उपलब्ध करा रही हैं तो प्रशासन भी वाहन की सुविधा मुहैया कराने की कोशिश में जुटा है।
विगत दो-तीन दिन से प्रशासन अमांपुर तिराहे से कई बसों के माध्यम से लोगाें को बरेली, बदायूं, फर्रुखाबाद, सिकंदराराऊ आदि क्षेत्रों में भेजा है। डीएम सीपी सिंह, एसपी सुशील घुले ने बताया कि बाहर से आने वाले एवं घर जाने वाले लोगों के लिए बसों की व्यवस्था की गई है।
लोग बोले, कई दिन तो खाना भी नहीं मिला
मैं सिकंदराराऊ के गोपी में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी की गाड़ी चलाता हूं। कंस्ट्रक्शन का काम बंद होने के कारण पैदल ही रामपुर स्थित अपने घर जा रहा हूं। प्रशासन ने बरेली तक बस की व्यवस्था की है, जिससे कुछ राहत मिलेगी।
- एबल सिंह, रामपुर।
मैं हरदोई का रहने वाला हूं। पिछले एक साल से गाजियाबाद में गाड़ी के सर्विस सेंटर पर काम करता हूं। एक दिन पूर्व दोपहर में पैदल घर के लिए निकला हूं। कई जगह प्राइवेट वाहनों से काफी पैसा खर्च करके यात्रा की। रास्ते में एक स्थान पर बिस्किट मिल गया।
- विद्या प्रकाश, हरदोई।
मैं दिल्ली में सिलाई का काम करता हूं। लॉकडाउन होने के कारण बच्चों के साथ घर गंजडुंडवारा जा रहा हूं। दिल्ली से गाजियाबाद तक पैदल आया। इसके बाद रोडवेज की बस से कासगंज आ गया। पुलिस टीम ने खाना खिलाया। अब गंजडुंडवारा के लिए पैदल ही निकल पड़ा हूं।
-मोहम्मद साहिब।
मैं राजस्थान के मंडला में सीमेंट की फैक्ट्री में पल्लेदारी का काम करता हूं। 25 मार्च को पैदल ही कासगंज के लिए चला था। रास्ते में कहीं कोई वाहन मिला तो कुछ दूरी उसके माध्यम से तय कर ली। रास्ते में कही खाना भी नहीं मिला। - विपिनपुर, नाथपुर, सिढ़पुरा